Tuesday, August 3, 2021
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एक मन्दिर किला ऐसा,जहाँ दीवानी रियासत की शानों-शौकत की पहचान हुआ करती थी, आज वंशजों के जलते मुर्दों में तब्दील.!

जबेरा/जनपद जबेरा की ग्राम पंचायत मुवार ग्राम जहां सदियों पहले दीवानी रियासत की शानो शौकत की पहचान हुआ करती थी 24 गांव  कचहरी,हुआ करती थी जहाँ मन्दिर किला से दीवानी महल राजमहल तक पहुंचने के लिए सुरंग हुआ करती थी जिसके अवशेष आज भी मन्दिर के अंदर मौजूद है.खजाना रखने के लिए तयखाना सिंघासन विश्राम के लिए पलंग मूर्तिया घोड़े की मूर्तियां वेदी कलस दीवारों पर सुंदर पेंटिंग यानी दीवानी रियासत की वह तमाम चीजें मौजूद थी जो इनकी शानो शौकत में चार चांद लगाया करती थी.

लेकिन बीते हुए समय के साथ साथ    पूर्वजों द्वारा विरासत में मिली धरोहरों को संभाल कर रखने में उनके वंशज सक्षम नही होने की बजह खण्डहर में त्वदील होता गया.वही शासन प्रशासन का ध्यान इस धरोहर की ओर नही गया और सदियों पुराने मंदिर किला कचहरी की कोई देखरेख नही होने पर धरोहर पर संकट खड़ा है मन्दिर किला दीवानी दरवाजे कचहरी अपने अस्त्तिव बचाने के लिए जूझ रही है!

दीवान दरयाव सिंह पूर्वजों द्वारा निर्मित इस मंदिर किला महल से मन्दिर तक अंदर ही अंदर मन्दिर तक पहुंचने के लिए सुरंग है दरवार की कचहरी हुआ करती थी जो आज भी खंडहर पड़ी हुई है जिसके बगल उनके वंशजो के मुर्दे जलाए जाते है और अब तो ग्राम पंचायत के द्वारा मन्दिर किला से लगा हुआ श्मशान में टीन सेटों को तैयार करवाकर श्मशान बना दिया गया है लेकिन मंदिर किला के प्रवेश द्वार पर अति प्राचीन गणेश भगवान की प्रतिमा सहित अनेको पुरातत्व महत्व की प्रतिमाएं पत्थरो की कलाकृतियों को देखकर लगता है कि इस मंदिर का वैभवशाली इतिहास अपने समय राजशाही ठाट बाट अद्भुत मिशाल हुआ करती थी जो आज खंडहर वीरान है.

मनोहर शर्मा/दमोह

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