Friday, September 24, 2021
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कई सदियों से, धनसरा में विराजमान है भगवान श्री गणेश की दुर्लभ प्रतिमा

नोहटा: जिले के नोहटा अंचल से लगे मोसिपुरा धनसरा कारीगांव के जर्रे जर्रे में हिंदू देवी देवताओं अति प्राचीन प्रतिमा है। बिखरी पड़ी हैं जिसमें से कुछ प्रतिमाओं को ग्रामीणों के द्वारा उठाकर चबूतरे मंदिरों में तो विराजमान कर दिया है। लेकिन कुछ ऐसी दुर्लभ प्रतिमा है। जो आज भी जहां-तहां बिखरे पड़े हैं। इन्हीं प्रतिमाओं में से एक ऐसी धनसरा गांव के बीच चबूतरे में विराजमान भगवान श्री गणेश अद्वितीय प्रतिमा है।

जो ग्रामीणों के बताए अनुसार जिले में अन्य कहीं नहीं जहां पर भगवान श्री गणेश का दस दिवसीय पर्व शुरू होते ही भगवान गणेश की दुर्लभ प्रतिमा के दर्शनों के लिए दर्शनार्थियों का आना-जाना बना रहता है। धनसरा गांव में भगवान श्री गणेश की सदियों पुरानी प्रतिमा विराजमान है। जो अद्वितीय प्रतिमा है। जहां पर गणेश चतुर्थी के पहले ही दिन से भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

स्थानीय लोग बताते हैं व्यारमा नदी किनारे में कभी गढ़िया किला हुआ करते थे। जिसके खंडहर होने पर भगवान गणेश की दुर्लभ प्रतिमा पहले खुले आसमान के तले बैठी थी। जिसको स्थानीय लोगों के द्वारा धनसरा गांव के बीच में एक चबूतरे में विराजमान कर दिया जहां पर भगवान श्री गणेश की मंगल मूर्ति दिव्य स्वरूप में आसन लगाए। ग्रामीणों ने बताया कि धनसरा ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र दूरस्थ गांव से 10 दिवसीय गणेश उत्सव में श्रद्धालुओं का आना जाना बना रहता है।

इस प्रतिमा की ख्याति दूर तक फैली है। धनसरा गांव के बीचों बीच भी सैकड़ों साल प्राचीन भगवान श्रीगणेश अनुपम प्रतिमा विराजमान हैं। गांव की बुजुर्ग बताते हैं इस प्रतिमा की प्राचीनता के संदर्भ में किसी को कोई जानकारी नहीं है। हमारे बाप दादों के जमाने से यह प्रतिमा पहले खुले आसमान तले पत्थरों के सहारे रखी हुई थी कि जिसको श्रद्धालुओं के द्वारा यहां यहां लाकर विराजमान कर दिया था।

गणेश भगवान की प्रतिमा हजारों वर्ष प्राचीन है। उनके दादा परदादा जन्म से ही इस प्रतिमा के दर्शन करते चले आ रहे हैं। इस तरह की अद्वितीय प्रतिमा दमोह जिले में कहीं नहीं है। राम लखन सिंह ने बताया धनसुरा गांव में विराजमान दुर्लभ भगवान गणेश की प्रतिमा जैसी प्रतिमा जिले के अन्य स्थानों में कहीं नहीं है। मौसीपूरा मढा से लेकर व्यारमा नदी किनारे कारी गांव में अलोकिक दुर्लभ प्रतिमा है।

जो जहां-तहां बिखरी पड़ी हैं वही शिलालेखों पर अंकित लिपि आज भी लोगों के लिए अपठनीय पहेली बनी हुई है। शासन प्रशासन से मांग की जा रही है की धनसरा गांव सहित कारीगांव मोसिपुरा मढा में बिखरी पड़ी दुर्लभ हिंदू देवी देवताओं की प्रतिमा को संरक्षित करते हुए यथा उचित स्थान प्रदान किया।

मनोहर शर्मा दमोह/ मध्य प्रदेश

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