Friday, September 24, 2021
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क्या शिक्षक होना गुनाह है.?

नई दिल्ली: हमारे देश में प्राइवेट शिक्षकों की हालत बदतर होती जा रही है.जबसे देश मे Covid-19,लॉकडाउन लगा है. प्राइवेट शिक्षकों के वेतन बंद हो गए जिस वजह से उनके परिवार को भूखों मरने की नौबत आ गई है. मार्च 2020, से अभी तक Covid-19, के वजह से पूरे देश मे लॉकडाउन लग गया सभी स्कूल कॉलेज बंद हो गए शरकारी शिक्षकों के वेतन तो समय पर उनके अकाउंट पर आ जाते है.

लेकिन बेचारे प्राइवेट शिक्षकों को वेतन ना मिलने से दिन पर दिन उनकी हालत ख़राब होती जा रही है, उनके परिवार के बुरे दिन आ चुके है.अब स्कूल बंद होने के कारण बच्चों का स्कूल ना आना अभिभावकों के द्वारा फीस का पैसा ना दे पाना जिस वजह से स्कूल का मैंनेजमेंट चला पाना बड़ी मुश्किल सी हो गई है.अब प्राइवेट शिक्षक रोड पर भी नहीं उत्तर पा रहें है और ना ही अनसन या आंदोलन कर पा रहें है.

मानो ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे इस देश मे शिक्षक होना गुनाह हो गया हो इस विषय पर शासन का कोई ध्यान नहीं जा रहा है.जबकि इस समस्या का समाधान करना शासन की नैतिक जिम्मेदारी व् दायित्व बनता है.इस समस्या कों देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन नई दिल्ली देश के सभी प्राइवेट शिक्षकों के समर्थन मे आगे आकर देश की शरकार से यह अपील करता है की देश के विभिन्न राज्यों के सभी प्राइवेट शिक्षकों के पूरे वेतन देने की मांग करता है.

और यह घोषणा करता है की यदि देश की शरकार के द्वारा समय पर इस मांग को पूरा नहीं किया जाता है तो आगामी विधानसभा व् लोकसभा चुनाव मे शरकार को इसके लिए बड़ी खामियाजा भुगतनी पड़ सकती है.एवं भारी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन नई दिल्ली एक बार पुनः भारत शरकार से यह अपील करता है की जल्द ही प्राइवेट स्कूलों कों भी संचालित करते हुए सभी प्राइवेट शिक्षकों के पूरे वेतन का भुकतान भी सीघ्र करें.

जय हिन्द, जय भारत, जय मानवाधिकार
मुकेश त्रिपाठी,
मध्यप्रदेश मिडिया प्रभारी
राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन नई दिल्ली

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