Thursday, August 5, 2021
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गैरतगंज तहसील के ग्रामीण अंचलों में स्कूलों में लटके रहे ताले,

:-(ग्रामीण अंचलों में स्कूल बंद होने के कारण छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार में)-:
:-(एक तरफ मध्य प्रदेश सरकार भांजे भांजीयों को शिक्षा के विषय को लेकर चिंता करते हैं।तो दूसरी तरफ शिक्षक स्कूलों में नदारद रहते हैं। शासन को चूना लगा रहे। विषय जांच का है।)-:
:-(तहसील के ग्रामीण अंचलों में तिरंगा के साथ खिलवाड़ शिक्षकों द्वारा लापरवाही देखी जाती है।)-:
:-(तहसील मुख्यालय पर शिक्षक बने फर्जी पत्रकार शिक्षाएं छात्र-छात्राओं को कहां से होगी प्राप्त)-:

गैरतगंज / तहसील गैरतगंज सहित जिले के ग्रामीण अंचलों में स्कूलों में शिक्षकों के द्वारा लापरवाही देखी जा रही है। भ्रष्टाचार इस कदर का मचा हुआ है। स्कूलों के ताले जंग खाते हुए। लटके हमेशा देखे जा रहे हैं। बता दें कि अब भी शिक्षक स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं। घर बैठे तनख्वाह ले रहे हैं। बता दें कि रजिस्टरों में हस्ताक्षर करके खानापूर्ति कर रहे हैं। ऐसे भी शिक्षक हैं। जो हमेशा स्कूलों में नदारद रहते हैं। विषय जांच का है। पालक गणों के एवं आम जनता के बीच में ग्रामीण अंचलों में जन चर्चाओं में हैं।

बता दें कि जिले के बीआरसी ऑफिस तहसील मुख्यालय गैरतगंज में कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं। फर्जी बीएसी के पद पर कई बार पदस्थ होकर वर्तमान पद को स्वयं सांठगांठ से संभाले हुए देखे जा रहे हैं। जो तहसील मुख्यालय गैरतगंज के नगर में जन चर्चा में है। बता दें कि ऐसे शिक्षक स्कूलों के नाम से कलंक है। शासन को चूना लगा रहे हैं। और गैरतगंज के नगर में घर बैठकर।

तहसील मुख्यालय के स्कूलों स्वयं फर्जी अधिकारी बने,ग्रामीण अंचलों के स्कूलों से शिक्षकों से अधिकारी बने,फर्जी पत्रकार बने,शिक्षक चांदी कमा रहे हैं। बता दें कि विशेष जांच का है। गैरतगंज मुख्यालय में नगर पंचायत में अधिकारियों को मालूम भी है। गैरतगंज की जनपद पंचायत में भी अधिकारियों को मालूम है। तहसील विभाग में। एवं जहां तक की अनुविभागीय अधिकारी एसडीएम गैरतगंज को भी मालूम है।

परंतु जांच का नहीं होना। कहीं ना कहीं अधिकारियों के साथ भ्रष्टाचार की डोर सांठगांठ में देखी जा रही है। गैरतगंज के नगर सहित क्षेत्र भर में आम जनता ने जिला कलेक्टर महोदय से जांच के लिए मांग की गई है। बता दें कि ऐसे शिक्षक हर जगह हर मोड़ पर फर्जी पत्रकार बनकर सरकारी दफ्तरों मैं बैठकर अधिकारियों के साथ मौज मस्ती कर रहे हैं। और राशि भी वसूल रहे हैं। ग्राम पंचायतों से भी मोटी रकम वसूली जाती है।

इस बात का इतिहास गवाह है। परंतु भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के साथ में अंधेर नगरी चौपट राजा का रूप गैरतगंज के नगर में देखा जा रहा है। ऐसे शिक्षक जो स्कूलों में पदस्थ होने के बाद वह स्कूलों के आज भी हाल बेहाल बच्चों का भविष्य अंधकार में देखा जा रहा है। एक तरफ मध्य प्रदेश सरकार शिवराज सिंह चौहान मामा अपने भांजे भांजीयों के उच्च शिक्षा के विषय को लेकर चिंता में देखे जा रहे हैं।

तो दूसरी तरफ गैरतगंज मुख्यालय पर ऐसे भ्रष्टाचारी भ्रष्ट फर्जी पत्रकार फर्जी पदों पर पदस्थ शिक्षकों द्वारा छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार में देखा जा रहा है। विषय जांच का है। बता दें कि जिले में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों को संज्ञान में यह मालूम होने के बाद भी आंख मिचोली का खेल चल रहा है। बता दें कि गैरतगंज में बीआरसी की मिलीभगत सांठगांठ से यह सब कुछ चल रहा है।

विषय जांच का है। बता दें कि 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर एवं गणतंत्र दिवस पर स्कूलों के ताले डले रहते हैं। शिक्षक खानापूर्ति के लिए पहुंच कर। इतिश्री करके ग्रामीणों के हवाले स्कूल को छोड़कर घर को वापस चले आते हैं। और वह हमारे देश की शान भारत का तिरंगा। लगा छोड़ भूल जाते हैं। और वह तिरंगा देर रात तक लगा हुआ रहता है। और यह मामला गैरतगंज मुख्यालय पर कई बार मामला प्रकाश में आया है। परंतु आज दिनांक तक जांच नहीं होना संदेह के घेरे में देखा जा रहा है।

बता दें कि गैरतगंज मुख्यालय के स्कूल जमानिया कला,शहीदपुर,सोडरपुर,देव नगर के पास किशनपुर जैसे स्कूलों सहित तहसील मुख्यालय गैरतगंज के ग्रामीण अंचलों में अनेक स्कूलों में ऐसे हालात नजर आए। परंतु बीआरसी गैरतगंज द्वारा कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। क्या कारण है। एक तरफ जिला प्रशासन भारत की शान तिरंगा का सम्मान करने में लगी है। तो दूसरी तरफ स्कूल शिक्षा विभाग में भारत की शान तिरंगा के साथ खिलवाड़ में देखी जा रही है। विषय जांच का है।

(एडमिशन के हाल देखें क्या हो रहा है)
जिले में ग्रामीण अंचलों में समय एडमिशन के पीरियड में संपूर्ण शिक्षकों को अपने-अपने स्कूलों में उपस्थित रहना चाहिए। लेकिन स्कूलों के ताले डले हुए। जंग खाए हुए देखे जा रहे हैं। जो स्कूल फूल भी रहे हैं। तो उनमें सिर्फ एकाद ही शिक्षक की उपस्थिति देखी जा रही है। मिलीभगत से शिक्षक छुट्टी मना रहे हैं। बता दें कि राज्य शासन के सख्त आदेश शासकीय स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य कर।

नए एडमिशन करवाने के निर्देश दिए हैं। शिक्षकों को ग्रामीण अंचलों में भ्रमण कर अधिकाधिक छात्रों के एडमिशन करवाने हैं। लेकिन लापरवाही का आलम यह है।की कोविड-19 के चलते कोरोना काल में लगातार 2 वर्षों से अवकाश पाने वाले शिक्षक अब भी स्कूल नहीं जाना चाहते हैं।

ऐसे में कई स्कूलों के तो ताले ही नहीं खुल पा रहे हैं। जहां पर स्कूल खुले हैं। वहां पर एक ही शिक्षक स्कूल ऑफिस में बैठता है। और स्कूल चलकर आने वाले छात्रों के एडमिशन की प्रक्रिया पूर्ण करता है। बाकी शिक्षक स्कूलों से नदारद रहते हैं। यह हाल आज भी जिले में जस का तस बना हुआ है। बता दें कि जन चर्चा में चर्चाओं का विषय है। मिलीभगत के चलते अन्य शिक्षक नदारद रहते हैं। विषय जांच का है।

इनका कहना है-
मुख्यालय के ग्रामीण अंचलों की जानकारी एवं शिक्षक बने फर्जी पत्रकार इसकी भी जानकारी मेरे संज्ञान में आइ है। मैं जांच करवाता हूं। दोषियों को माफ नहीं किया जाएगा। विभागीय जानकारी संबंधित विभाग को जांच के लिए भेजूंगा।
(मोतीलाल अहिरवार तहसीलदार गैरतगंज)

इनका कहना है-
यदि कोई शिक्षक स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं। और स्कूल बंद मिल रहा है। या एक ही शिक्षक स्कूल पहुंच रहे हैं। तो यह गंभीर अनुशासनहीनता है। ग्रामीण अंचलों के स्कूलों की इस तरह की जानकारी। पालकगणों एवं ग्रामीणों द्वारा प्राप्त जानकारी तिरंगा की मीडिया द्वारा मेरे संज्ञान में यह बात आई है। ऐसे शिक्षकों के खिलाफ जो मेरे अधिकार क्षेत्र में होगा। सख्त कार्रवाई करूंगा। बीएससी के पद पर फर्जी शिक्षक को भी माफ नहीं करूंगा। मेरे द्वारा जांच करते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी। (आनंद शर्मा जिला शिक्षा वरिष्ठ अधिकारी रायसेन)

अभिषेक मालवीय रायसेन
डेली खबर मीडिया/रायसेन/गैरतगंज

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