Friday, September 24, 2021
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युगावतार गुरुदेव श्री श्री ठाकुर अनुकूल चंद्र जी का आज 14 सितंबर जन्म दिवस

छत्तीसगढ़/बिलासपुर/14 सितंबर 2021 / युग पुरुषोत्तम युगावतार गुरुदेव श्री श्री ठाकुर अनुकूल चंद्र जी का 14 सितंबर को शुभ जन्म दिवस है।जीवन पथ का मार्ग प्रशस्त कर अलौकिक ज्ञान प्रदान करने वाले गुरुदेव श्री श्री ठाकुरजी की गुरुदीक्षा से देश के महान विभूतियों सहित करोड़ो लोग दीक्षित हुए है।1987 में भारत सरकार ने इनके सम्मान में डाक टिकट जारी कर इनके प्रति श्रद्धा व्यक्त किये थे।आज वर्तमान में देश विदेश में भी इनके सत्संग व दीक्षा को ग्रहण कर लोग लाभान्वित हो रहे है।

14 सितंबर 1888 को ताल नवमी के दिन श्री श्री ठाकुर अनुकूल चंद्र जी का आविर्भाव इस धराधाम पर हुआ है।बांग्लादेश के हिमायत पूरा गाँव मे जन्मे श्री श्री ठाकुरजी बचपन से ही अलौकिक शक्तियों से परिपूर्ण थे, इनके जन्म के पूर्व ही बड़े बड़े संत महात्माओं ने कलियुग में इनके आने का संकेत दिया था।इनकी माता मनमोहनी देवी को स्वप्न में ही आगरा दयाल बाग के हुजूर जी महाराज ने मंत्र प्रदान कर गर्भ में युग पुरुषोत्तम बालक जन्म लेने की उत्तम घोषणा किये थे।श्री श्री ठाकुरजी की शिक्षा कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज तक हुई थी,तत्पश्चात वे बांग्लादेश छोड़कर झारखंड के देवघर में सत्संग आश्रम का निर्माण किये जहाँ से वे सत्संग का विस्तार कर मानव जीवन को सत्य के पथ पर चलकर मनुष्य बनने की प्रेरणा देना शुरू किए , सुभाष चंद्र बोस के माता पिता , देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री सहित कई विभूतियों ने ठाकुरजी की दीक्षा ग्रहण कर अपने जीवन मे सत्य के पथ को ग्रहण किया था।राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ठाकुरजी के दर्शन के लिए जब उनके आश्रम गए तो वे आश्रम देखकर भावविभोर होकर बोले इस आश्रम में मनोरम दृश्य के साथ ही दैविक वातावरण का वास दिखाई पड़ता है अपने जीवन काल मे ऐसे आश्रम का दर्शन मैंने आज तक नही किया है।

श्री श्री ठाकुरजी के अनन्य भक्तों ने उनकी जीवन लीला देखकर उन्हें समस्त देवों का संग्रह रुप मानते हुए हिंदुओ ने उन्हें भगवान कृष्ण का रूप कहा तो मुस्लिमो ने खुदा माना है।उस समय के तात्कालिक अमेरिकी विश्व दर्शन शास्त्री लेट मिस्टर रे हाउजर मैन ने श्री श्री ठाकुरजी को इस युग के ईसा मसीह मानते हुए अपने जीवन के 25 वर्ष उनके आश्रम देवघर में व्यतीत कर दिए थे।

श्री श्री ठाकुरजी मानव जीवन का उत्थान करने पर भी कभी अखबारों के सुर्खियों में नही रहे है, इसपर एक बार देश के वरिष्ठ पत्रकारों ने उनसे पूछा था की आप इतना मानव सेवा करने के पश्चात भी कभी अखबारों में नही छपवाया उसपर दयाल ठाकुर बोले क्या आप अपने परिवार की सेवा करने के पश्चात कभी अखबारों में प्रकाशित किये जिसपर पत्रकारों ने कहा अपने परिवारों का सेवा करना तो मनुष्य का धर्म है इसपर ठाकुरजी बोले ठीक उसी प्रकार संपूर्ण जगत ही मेरा परिवार है इनकी सेवा करना मेरा धर्म है तो फिर इसे अखबारों में कैसे प्रकाशित कर सकता हूँ, यह सुनकर उपस्थित पत्रकार गण स्तब्ध रह गए।

27 जनवरी 1969 को श्री श्री ठाकुरजी अपना देह त्याग कर बैकुंठ धाम को गमन किये थे।श्री श्री ठाकुरजी के देह त्याग से पूर्व जब भक्तों ने पूछा की इस विशाल सत्संग सहित हमारे जीवन का मार्गदर्शन कैसे होगा तभी ठाकुरजी बोले मेरे बाद ही मेरे ज्येष्ठ पुत्र श्री श्री अमरेंद्र नाथ चक्रवर्ती श्री श्री बड़ दा ही तुम्हे मार्गदर्शन करेंगे।आज वर्तमान में श्री श्री बड़ दादा के देहत्याग करने पर उनके ज्येष्ठ पुत्र श्री श्री अशोक चंद्र चक्रवर्ती जी पूज्यपाद आचार्य देव सत्संग जगत का संचालन कर रहे है साथ ही उनके ज्येष्ठ पुत्र पूज्यनीय बबाई दादा इस मिशन में अपनी पूरी जीवन समर्पित कर मानव उत्थान में लगे हुए है और बनान चाहते है एक ऐसा मनुष्य युग जहाँ कोई भी अमानवीय पथ पर न चले व सबके जीवन मे मंगल ही मंगल हो।

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