Tuesday, June 15, 2021
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वर्तमान परिस्थिति में सोयाबीन बीज की गुणवत्ता बोनी योग्य बीज के संबंध में सम -सामायिक सलाह,

इंदौर / भारतीय सोयाबीन अनुसंधान केन्द्र की निर्देशक सुश्री नीता खांडेकर द्वारा इंदौर जिले के सोयाबीन कृषकों को वर्तमान स्थिति में सोयाबीन के गुणवत्तापूर्ण बीज के संबंध में आवश्यक सलाह दी गई है। उन्होंने बताया है कि कृषकबंधु सोयाबीन की एक ही किस्म पर निर्भर रहने की बजाए अलग अलग समयावधि में पकने वाली(शीघ्र पकने वाली,माध्यम समयावधि वाली व अधिक समयावधि वाली) कम से कम 2-3 किस्मों की खेती करे। वर्तमान में किसानों में प्रचलित सोयाबीन प्रजाति जे.एस.95-60 में विगत कुछ वर्षों से कीट व्याधियों की समस्याओं में वृद्धि देखी जा रही हैं। अतः सलाह है कि इस किस्म के स्थान पर विकल्प के रूप में शीघ्र समयावधि में पकने वाली अन्य किस्म जे.एस.20-34 की खेती की जाये। विगत कुछ वर्षों में फलियाँ पकने के समय अधिक समय तक अत्यधिक वर्षा के कारण सोयाबीन की फसल में नुकसान हुआ हैं। इसीलिए किसान सोयाबीन किस्मों की विविधता बढाने हेतु जे.एस.20-29, जे.एस.20-69,जे.एस.20-98 जैसी किस्मों के अंतर्गत क्षेत्र बढाकर जे.एस.95-60 का क्षेत्रफल कम करें। उन्होंने बताया कि सोयाबीन की बोवनी से पूर्व उपलब्ध बीज का अंकुरण परिक्षण करें एवं न्यूनतम 70 प्रतिशत अंकुरण एवं बीज का आकार के आधार पर 60-80 किग्रा बीज दर का प्रयोग करें। सोयाबीन में विगत वर्षों से देखी जा रही फफूंद एवं वायरस जनित बीमारियों से सुरक्षा के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले रोग मुक्त बीज का उपयोग की जाये।

भारतीय सोयाबीन अनुसंधान केन्द्र की निर्देशक सुश्री खांडेकर ने बताया है कि कृषकजन कीट-रोग से सुरक्षा की दृष्टी से सोयाबीन की बोवनी के समय फफूंदनाशक,कीटनाशक एवं जैविक कल्चर से बीजोपचार अवश्य करें। इसके लिए बोवनी से पहले सोयाबीन बीज को अनुशंषित पूर्वमिश्रित फफूंदनाशक पेनफ्लूफेऩ़+ट्रायफ्लोक्सिस्ट्रोबीन 38 एफ.एस.(1 मि.ली./कि.ग्रा. बीज) या कार्बोक्सिन 37.5%+थाइरम 37.5% (3 ग्राम/कि.ग्रा. बीज) या थाइरम (2 ग्राम) एवं कार्बेन्डाजिम (1 ग्राम) प्रति कि.ग्रा. बीज अथवा जैविक फफूंदनाशक ट्राइकोडर्मा विरिडी (8-10 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज) से उपचारित करें। इसके साथ-साथ पीला मोजाइक बीमारी एवं तना मक्खी का प्रकोप प्रत्येक वर्ष होने वाले क्षेत्रों में उपरोक्त फफूंदनाशक से बीजोपचार के पश्चात कीटनाशक थायामिथोक्सम 30 एफ.एस.(10 मि.ली. प्रति कि.गा. बीज) या इमिडाक्लोप्रिड (1.25 मि.ली./कि.ग्रा. बीज) से बीज उपचार करें। इन अनुशंषित कवकनाशियों द्वारा उपचारित बीज को छाया में सूखाने के पश्चात् जैविक खाद ब्रेडीराइजोबियम कल्चर तथा पीएसबी कल्चर दोनों (5 ग्राम/कि.ग्रा बीज) से टीकाकरण कर तुरन्त बोवनी हेतु उपयोग करना चाहिए। कृषकगण यह विशेष ध्यान रखें कि क्रमानुसार फफूंदनाशक, कीटनाशक से बीजोपचार के पश्चात् ही जैविक कल्चर/खाद द्वारा टीकाकरण करना चाहिए। साथ ही कल्चर व कवकनाशियों को एक साथ मिलाकर कभी भी उपयोग में नहीं लाना चाहिए। जबकि जैविक फफूंदनाशक ट्राइकोडर्मा विरिडी का उपयोग करने की स्थिति में अनुशंषित कीटनाशक से बीजोपचार पश्चात तीनों जैविक उत्पाद (रायझोबियम एवं पीएसएम कल्चर तथा ट्राइकोडर्मा विरिडी) को मिलाकर बीज टीकाकरण कर सकते हैं।

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