Saturday, December 10, 2022
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सनसनी खबर : अल्लापल्ली वन विभाग की शासन के साथ जालसाजी कर बिना काम के लाखों रूपए डकारे

गड़चिरोली : अल्लापल्ली वन विभाग के द्वारा शासन के लाखो रुपए की महाठगी की एक सबूत के साथ सनसनीखेज खुलासा। महाठगी में वन विभाग को साथ दिया । मुलचेरा महसूल विभाग के कर्मचारी। बड़ी सफाई के साथ शासन के लाखो रुपए एक काम से बाकायदा शासकीय वन विभाग की खर्च कर ठगना।

देश में कभी महाठग नाम से मशहूर नटवरलाल किसी जमाने में हुआ करता था। परंतु महाराष्ट्र के गड़चिरोली जिला के अल्लापल्ली वन विभाग के अहेरि वन परिक्षेत्र अंतर्गत कंचनपुर गांव के सर्वे क्रम 183 जो 2015 तक वन विभाग की जंगल हुवा करती थी। जिसका जीता जागता सबूत हैं। वन विभाग परिक्षेत्र अधिकारी के द्वारा माहिती अधिनियम अंतर्गत लिखित जानकारी देना 183 सर्वे क्रम में 2014/15 वर्ष में लाखो रुपए खर्च किए,जल सीवर और लिफ्ट अरिगेसन के काम के लिए। परंतु असल में वहा तो कोई भी काम हुआ ही नहीं। क्युकी मुलचेरा महसूल विभाग भी एक माहिती अधिनियम के तहत जानकारी दी हैं।उसके मुताबिक सर्वे क्रम 183 पर तो 1985 से 1992 में लगाम में रहने आए एक घुसपेटी का कब्जा हैं। महसुल विभाग के अतिक्रमण नोंद रजिस्टर की प्रत मुताबिक उस जमीन पर घुसपैठी 3 भाई के नाम अतिक्रमण नोंद कराई गई 2007 में।और उस जमीन पर अतिक्रमण धारी का 2018 तक कोई कब्जा ना होने के बाद भी जमीन वन विभाग और महसूल विभाग के मुताबिक अतिक्रमण धारी के कब्जा में हैं। फिर नामुमकिन हैं ,अल्लापल्ली वन विभाग 2002में रोप लागवाड़ नहीं की और ना ही रोप लगाने में कोई खर्च की। खर्च के नाम पर शासन का पैसा खर्च के नाम पर लूट लिया।

उसी प्रकार वन विभाग और महसूल विभाग के मुताबिक 183 पर अतिक्रमण धारी का कब्जा था । तो वन विभाग 2014/15 में लाखो रुपए खर्च के नाम पर भ्रष्टचार कर लाखो रुपए का गबन किया। जिनमे लगाम क्षेत्र के उस समय के आरएफओ,आर ओ, बिट गार्ड से लेकर बड़े अधिकारी की मिलीभगत से लाखो रुपए डकार लिए गए। केवल बोगस खर्च के नाम पर। हकीकत में सच्चाई कुछ और हैं। वन विभाग से लेकर महसूल विभाग रिश्वत लेकर एक घुसपेटी को 183 सर्वे क्रम की तकरीबन 25 से 30 एकार वन जमीन 2015 में वन विभाग से बोगस तरीके से हस्तानांतर कर जंगल महसुल विभाग में किया गया।फिर 2015/16 में ही अतिक्रमण नोंद रजिस्टर पर बोगस तरीके से घुसपेटी का नाम नोंद चढ़ाकर जंगल 1985 से अतिक्रम के कब्जा दिखाकर ।

भ्रष्टचार की कहानी केवल रिश्वत के जोरपर खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए। शासन के पैसे का खर्च के नाम लाखो रुपए डकार लिया गया। जबकि लगाम क्षेत्र के हजारों जनता जानता हैं। 183 सर्वे क्रम पर 2018 तक किसी भी प्रकार का कोई अतिक्रमण नही था। जबकि आज भी बहुत से बुजार्ग जवान लोग कहते हैं।जब 2018 तक कोई भी अतिक्रमण था नही था। फिर जंगल एकाएक घुसपेटी कब्जा धारक कैसे बन सकता हैं। क्षेत्र के आम नागरिकों का कहना हैं।कैसे क्षेत्र के गैर आदिवासी को 2018 के बाद भी खुलेराम शासकीय राखीव जमीन जंगलों पर अतिक्रमण करने का हक दिया गया। जब 2005 के बाद किसी भी प्रकार की कोई भी अतिक्रमण नोंद करवाना शासन की ओर से बंद कर दिया गया। फिर 2015 के बाद बोगस तरीके से 2007 तारिक पर अतिक्रमण नोंद दर्ज किया गया।

महसूल विभाग कैसे वन विभाग की तरह भ्रष्ट काम किया। किया हैं तो 2018 में ही लगाम के आम नागरिक के द्वारा सभी सबूत के साथ लिखित शिकायत के बाद भी कारवाही क्यू नही की? और वन विभाग 2014/15 लाखो रुपए खर्च किया हैं। फिर 2018 में की गई अतिक्रमण क्यू नही हटाया? इसका मतलब साफ हैं। ना वन विभाग लाखो रुपए खर्च की ना काम किया। खर्च केवल वन विभाग की खर्च रजिस्टर पर शासन के लाखो रुपए गबन करने के नाम पर किया गया। जानकारी अनुसार वन विभाग के बड़े अधिकारी के द्वारा अतिक्रमण की शिकायत की फाइल भी बंद करदी। जमीन हमारी नही। और वन विभाग की जमीन पर कोई अतिक्रमण नही हुई। वैसा बोगस तर्क देकर फाइल बंद करना कही ना कही वन विभाग महाभ्रष्ट कारभार हुआ ,और इसी प्रकार अनगिनत काम के नाम पर खर्च दिखाकर शासन का करोड़ो रुपए ठगी किं गाई ।

जांच के नाम पर महसूल विभाग वन विभाग घुमा फिरा कर शिकायत कर्ता को मानसिक रूप से परेशान कर ,समय बर्बाद कर।जांच के नाम पर भी ठगी करते दिखा जा सकता हैं। जिसका जीता जागता सबूत अल्लापल्ली वन विभाग और मुलचेरा महसूल विभाग की देखा जा रहा हैं। क्षेत्र की नागरिक वन विभाग महसूल विभाग की जांच होगी। इस भरोसे रहना एक मुंगेरीलाल की सपने देखने समान साबित हुआ। ना जांच हुई और ना अतिक्रमण जंगल खाली हुई। हुई हैं तो केवल शिकायत की फाइल हमेशा के लिए बंद हुई। क्युकी जांच हुई तो वन विभाग और महसूल विभाग कई अधिकारी जेल जाएंगे। इनके महाभ्रष्ट घोटाला देश के सामने आयेगी। डर और घोटाला को दबाने में ही भलाई समझी। जिस कारण शासन की करोड़ो की जमीन और खर्च की रक्कम बर्बाद कर शासन का नुकसान किया गया।

गड़चिरोली से ब्यूरो चीफ ज्ञानेंद्र विश्वास

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