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देवश्री जागेश्वरनाथ महादेव धाम में 274 वर्ष पहले हुई थी जगत जननी पार्वती माता की प्राण प्रतिष्ठा! अद्भुत-वनावट -मूर्ति की दृष्टि ठीक जागेश्वरनाथ महादेव पर पड़ती है

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दमोहः
बुंदेलखंड ही नही सम्पूर्ण भारत मे आस्था का केंद्र बने स्वयंभू शिव लिंग देव श्री जागेश्वरनाथ महादेव मन्दिर 1711 में निर्माण के 35 वर्ष वाद 31 मीटर की दूरी पर समुख दूसरा प्राचीन मंदिर है जिसमें माता पार्वती की प्रतिमा जिसकी प्राण प्रतिष्ठा सन 1746 मैं हुई थी ऐसा कहा जाता है कि इसी वर्ष में हटा गौरीशंकर का मन्दिर है जिसमें मूर्ति की स्थापना हुई थी!बांदकपुर मन्दिर का प्रवेश पश्चिम की तरफ ठीक श्री जगेश्वरनाथ जी के मन्दिर के सामने है माता पार्वती का मन्दिर!महादेव मंदिर के ही सामने परिक्रमा मैं तीन अन्य प्रचीन द्वार उत्तर दक्षिण और पश्चिम मैं है परिक्रमा मैं गणपति तथा अन्य देवो की मूर्तियां रखी हुई है!मन्दिर के गर्भ स्थल मैं ठीक श्री जागेश्वरनाथ महादेव लिंग मूर्ति के सामने माता पार्वती की मूर्ति विराजमान है!मूर्ति लगभग 1 मीटर ऊंची संगमरमर की है इस मूर्ति की दृष्टि ठीक जागेश्वरनाथ महादेव पर पड़ती है!कलाकार ने इसकी स्थापना अद्भुत ढंग से की है कि दर्शनार्थी श्री महादेव जी की पूजा करते समय माता पार्वती के दर्शन और माता पार्वती की पूजा करके लौटते समय महादेव जी के दर्शन कर संकें!इस मंदिर के गर्भभाग मैं दर्शनार्थियो का प्रवेश नही कर सकते गर्भ द्वार से ही दर्शनार्थियों को पूजन दर्शन जल इत्यादि माता पार्वती को अर्पण करना पड़ता है इस मंदिर का बाहरी मूल स्वरूप की बनावट देव श्री जागेश्वरनाथ महादेव मंदिर के समान है
जागेश्वरनाथ मन्दिर प्रवंधक रामकृपाल पाठक बताते है कि देव श्री जागेश्वरनाथ मन्दिर का निर्माण 1711 में हुआ ठीक 35 वर्ष वाद जंगत जननी माता पार्वती की प्रतिमा की मन्दिर में प्राण प्रतिष्ठा हुई थी और यह मन्दिर 274 वर्ष प्राचीन सिद्ध प्रतिमा है जहां माता पार्वती के दर्शनों के लिए नवरात्रि में जिले सहित पूरे बुंदेलखंड से श्रद्धा भक्ति के साथ आते है मां की छवि श्रद्धालुओं के मन को श्रद्धाभक्ति से भर देती है!
डेली खवर
ओमप्रकाश शर्मा
दमोहः मध्यप्रदेश

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