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साप्ताहिक व्रत त्यौहार 2023 (26 जून-2 जुलाई): जून महीने के आखिरी हफ्ता व्रत-त्योहारों के दर्शन से बहुत ही खास रहने वाला। इस सप्ताह यानी 26 जून से 2 जुलाई के दौरान कई महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार मनाए गए हैं।

जून के आखिरी सप्ताह से ही चातुर्मास की शुरुआत होगी, जो इस साल 5 महीने तक रहेगा। इसके साथ इस सप्ताह देवशयनी एकादशी, मासिक दुर्गाष्टमी, कोकिला व्रत, वासुदेव द्वादशी और शनि प्रदोष व्रत जैसे त्योहार पड़ेंगे। इस तरह से धार्मिक दृष्टिकोण से यह सप्ताह बहुत ही खास होने वाला है। जानिए 26 जून से 2 जुलाई तक के बीच वीडियो वाले व्रत-त्योहारों के बारे में.

  • 26 जून 2023 सोमवार, मासिक दुर्गाष्टमी (मासिक दुर्गा अष्टमी 2023): पंचांग के अनुसार हर माह दुर्गाष्टमी मनाई जाती है, जिसे मासिक दुर्गाष्टमी कहा जाता है। इस बार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाता है। वहीं इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पर्व पर दुर्गाष्टमी व्रत रखा जाएगा। इस दिन मां भगवती की पूजा की जाती है। इससे साधक को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • 29 जून 2023, गुरुवार, देवशयनी एकादशी और चातुर्मास आरंभ (Devshayani ekadashi 2023 and Chaturmas 2023): आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी है और इसी दिन से चातुर्मास भी शुरू हो जाएगा। चातुर्मास में भगवान विष्णु का निवास क्षीरसागर में होता है और पूरे चार महीने तक विष्णु जी योग निद्रा में चले जाते हैं। हालांकि अधिकमास लगने के कारण इस साल चातुर्मास चार नहीं बल्कि पांच महीने का होगा।
  • 30 जून 2023 शुक्रवार, वासुदेव द्वादशी (वासुदेव द्वादशी 2023): पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास में द्वादशी तिथि के दिन वासुदेव द्वादशी मनाई जाती है। साथ ही इस दिन देवशयनी एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा। सिद्धांत यह है कि, वासुदेव द्वादशी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और व्रत से संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
  • 01 जुलाई 2023 शनिवार, शनि प्रदोष व्रत (Shani Pradosh Vrat 2023): पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को शनि प्रदोष व्रत रखा जाता है। शनिवार के दिन की प्राप्ति के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। भगवान शिव की पूजा में प्रदोष व्रत का महत्व
  • 02 जुलाई रविवार, कोकिला व्रत (Kokila Vrat 2023): आषाढ़ पूर्णिमा के दिन कोकिला व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव और देवी सती की पूजा होती है। सिद्धांत यह है कि इस व्रत को अखंड स्वर और शीघ्र विवाह का आशीर्वाद दिया जाता है।

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Umesh Solanki

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