[ad_1]
हरियाली तीज 2023 तिथि और समय: सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का व्रत रखा जाता है। इसे श्रावणी तीज भी कहते हैं. ये है सुहाग पर्व. हरियाली तीज पर स्त्री सुयोग्य वर पाती है और अपने पति की कामना से शिव-पार्वती की विधि विधान से पूजा करती है।
अपना नाम प्रकृति हरियाली तीज पर रंग का विशेष महत्व है। आइए जानते हैं हरियाली क्यों तीज का रंग हरे से क्या है खास रिश्ता, फैब्रिक को इस दिन हरे रंग का विशेष उपयोग करना चाहिए।
हरियाली तीज का हरे रंग से संबंध (हरियाली तीज हरे रंग का महत्व)
- सावन में प्रकृति के चारों ओर हरे रंग की छत्ता बिखरी रहती है। हरा रंग समग्र प्रकृति में व्याप्त है। हरा रंग स्वर, भक्ति, शक्ति, मानसिक शांति प्रदान करता है।
- हरा रंग शिव जी को अति प्रिय है। यही कारण है कि हरियाली तीज पर शैतान को हरा रंग अवश्य उपयोग में लेना चाहिए।
- रंग हरे का उपयोग स्वास्थ्यवर्धक होता है और व्यक्ति में नवीनता का संचार होता है।
- सिद्धांत है इस दिन हरे रंग का उपयोग करना और सिद्धांतों से भाग्य पर अति शुभ प्रभाव ह, अखंड सौभाग्य के साथ संत प्राप्ति का भी आशीर्वाद है।
हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है (हरियाली तीज व्रत लाभ)
शिव पुराण के अनुसार हरियाली तीज पर ही शंकर जी ने माता पार्वती की कठोर तपस्या के बाद उन्हें अर्धांगिनी स्वीकार किया था। यही कारण है कि शिव के समान पति पाने और सदाबहार रहने के लिए हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाता है। हरियाली तीज मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में मनाई जाती है।
साल में तीन बार मनाई जाती है तीज
तीज का त्यौहार वर्ष में तीन बार मनाया जाता है, जिसमें प्रथम भी शामिल है वंहा हरित तीज, दूसरी भाद्रपद की कजरी तीज और फिर भादो की हरतालिका तीज मनाई जाती है। हरित तीज पर महिलाएं हरी चूल्हे, हरी पौध और हरी पौधा लगाती हैं।
रुद्राक्ष: गर्भवती महिलाओं को क्यों नहीं धारण करना चाहिए रुद्राक्ष, जानिए इसके बहुत ही खास कारण
अस्वीकरण: यहां चार्टर्ड सूचना सिर्फ अभ्यर्थियों और विद्वानों पर आधारित है। यहां यह जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह के सिद्धांत, जानकारी की पुष्टि नहीं होती है। किसी भी जानकारी या सिद्धांत को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
[ad_2]
Source link