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गुड़ चना भोग: हिन्दू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ के दौरान देवी-देवताओं का भोग लगाया जाता है। भगवान को चढ़ाने को लेकर गीता में भगवान कहते हैं- ‘जो भक्त मेरे लिए प्रेम पत्र, पुष्प, फल, जल आदि अर्पण करता है, वह शुद्ध बुद्धि निष्काम प्रेमी भक्त का प्रेम भोग अर्पण करता है, वह पत्र पुष्प आदि मैं ग्रहण करता हूं .’
लकड़ी घर पर पूजा-पाठ हो मंदिर में, देवी-देवताओं की मूर्ति के संयोजन प्रसाद चढ़ाने की परंपरा रही है। प्रसाद में कई तरह के भोग शामिल होते हैं, जैसे खेड, मालपुए, लोध, चना-दी, नारियल, गुड़-चना, हलवा और फल आदि। इसमें गुड़ चने के प्रसाद को महत्वपूर्ण माना गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देवी-देवताओं को गुड़-चने का प्रसाद चढ़ाना और गुड़-चने का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा कैसे शुरू हुई।
कैसे शुरू हुआ गुड़-चना प्रसाद का प्रचलम
गुड़-चना भोग के संबंध में कहा जाता है कि, एक बार देवर्षि नारद भगवान विष्णु से आत्मा का ज्ञान प्राप्त करना चाहते थे। लेकिन जब भी वो विष्णुजी के पास जाते हैं तो विष्णुजी उन्हें पहले ये ज्ञान के योग्य बात कहते थे। इसके लिए नारदजी ने कठोर तप किया। लेकिन इसके बावजूद भी भगवान विष्णु से उन्हें आत्मा का ज्ञान प्राप्त नहीं हुआ।
तब नारदजी धरती की ओर चल पड़े। उन्हें धरती लोक पर एक मंदिर दिखाई दिया, जहां उन्होंने साक्षात् विष्णुजी को विराजमान होते देखा। उन्होंने देखा कि एक महिला अपने हाथों से भगवान को कुछ खिला रही है। नारदजी उस महिला के पास गए और बड़ी उत्सुकता से पूछा, हे माता! आप नारायण को कौन सी दिव्य सामग्री खिली रही थी, जिसे प्रभु आपके हाथों से प्रेमपूर्वक ग्रहण कर रहे थे? छोटी महिला ने नारदजी से कहा, उसने भगवान को गुड़-चने का भोग लगाया।
इसके बाद नारदजी धरती पर जप-तप और व्रत करने लगे। उन्होंने भगवान विष्णु की पूजा की और गुड़-चने का भोग लगाया। साथ ही लोगों में भी गुड़-चने का प्रसाद लागे.
नारदजी की भक्ति से सबसे लोकप्रिय तारा दिवस एक नारायण प्रकट हुआ और उन्हें आत्मा का ज्ञान दिया गया। वहीं उस अंतिम महिला को बैकुंठ धाम की प्राप्ति हुई। भगवान विष्णु नारद से बोले, सच्चा भक्ति वाला व्यक्ति ही ज्ञान का अधिकारी होता है। कहा जाता है कि इसके बाद से ही गुड़-चने का प्रसाद वोग हो गया। ऋषि, मुनियों से लेकर भक्त भी अपने इष्ट को गुड़ और चने का प्रसाद चढ़ाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
किन देवी-देवताओं को चढ़ाया जाता है गुड़-चने का प्रसाद
- भगवान विष्णु: श्रीहरि ने नारदजी से कहा था, ‘जो व्यक्ति मुझे प्यार से गुड़ और चने की दाल का भोग लगाता है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी होंगी।’ इसके बाद सभी वैष्णव जन विष्णुजी को गुड़ और चने की दाल का भोग लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
- हनुमान जी: हनुमान जी को गुड़ चने का प्रसाद चढ़ाया जाता है। सिद्धांत है कि इससे हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और मंगल दोष भी दूर होता है। अगर आपने भगवान को कुछ नहीं खिलाया तो मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी को श्रद्धा से गुड़ चने का भोग लगाना चाहिए। इससे आपकी सभी सर्विस दूर हो जाएगी।
- माँ संतोषी: शुक्रवार के दिन संतोषी माता की पूजा में गुड़-चने का भोग लगाएं। आप इस प्रसाद को स्वयं भी ग्रहण कर सकते हैं और सभी में बाँट भी सकते हैं। लेकिन शुक्रवार को गुड़-चने का प्रसाद खाने के बाद खट्टी चीजें भूलकर भी न चलीं।
- शनि देव: शनिवार के दिन शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए शनि देव को गुड़ या चने का भोग लगाएं और इसे अधिक से अधिक लोगों में बांटें।
गुड़-चने के फायदे: धार्मिक आहार से गुड़-चने के भोग का बहुत महत्व होता है। स्वयं भगवान विष्णु ने अपनी महत्ता का उल्लेख किया है। लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से भी गुड़-चना बहुत खतरनाक होता है. गुड़-चने के सेवन से खून की कमी भी दूर होती है और शारीरिक शक्ति पैदा होती है। साथ ही गुड़-चना एनिमिया से प्राप्त होता है और शरीर में आवश्यक भंडार की बिक्री होती है। गुड़-चना से शरीर में आयरन अवशोषत यौगिक होता है जिससे शक्ति का संचार होता है, जिससे व्यक्ति को थकान और कमजोरी महसूस नहीं होती है।
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