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पटना: पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) ने गुरुवार को कहा कि आरजेडी, कांग्रेस, टीएमसी जैसी दो दर्जन पार्टियां सिर्फ परिवारवाद और भ्रष्टाचार को बचाने के लिए मोर्चा बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध कर रही हैं. इनके पास विकास का कोई एजेंडा नहीं है. ‘इंडिया’ गठबंधन नाम के घमंडिया मोर्चे के प्रमुख दलों में परिवारवाद इतना हावी है कि पार्टी का शीर्ष पद परिवार के लिए रिजर्व है. आरेजेडी में लालू प्रसाद आजीवन अध्यक्ष रहेंगे. क्या इस प्रवृत्ति से आजादी नहीं मिलनी चाहिए?

परिवारवाद पर सुशील कुमार मोदी का हमला

सुशील कुमार मोदी ने कहा कि 2024 का लोकसभा चुनाव भ्रष्ट्राचार-इंडिया छोड़ो, परिवारवाद-इंडिया छोड़ो और तुष्टीकरण-इंडिया छोड़ो के नारे पर लड़ा जाएगा. 1942 में ब्रिटिश पराधीनता से मुक्ति के लिए महात्मा गांधी के नेतृत्व में ‘क्विट इंडिया’ आंदोलन शुरू हुआ था, लेकिन आज 71 साल बाद परिवारवाद, भ्रष्ट्राचार और वोट बैंक की राजनीति के विरुद्ध फिर इसकी जरूरत है. इस नए भारत छोडो आंदोलन का नेतृत्व प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं. जिन लोगों ने गरीबों को धोखा देकर उनके वोट से वर्षों तक राज किया, लेकिन गरीबी मिटाने के बजाय अपनी सात पीढियों के लिए संपत्ति बटोर ली, वे सब आज प्रधानमंत्री का विरोध कर रहे हैं. क्या ऐसे गहरे भ्रष्ट्राचार को भारत से बाहर नहीं किया जाना चाहिए?

‘जनता इस दौर का क्विट इंडिया मूवमेंट भी सफल बनाएगी’

बीजेपी नेता ने कहा कि इन्हीं 24 दलों की केंद्र या राज्य सरकारों की बेलगाम तुष्टीकरण नीति के चलते बिहार, पश्चिम बंगाल, असम जैसे सीमावर्ती राज्यों में बांग्लादेशी-रोहिंग्या घुसपैठ की समस्या देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गई. क्या ऐसे तुष्टीकरण को भारत से भगाना जरूरी नहीं है? प्रधानमंत्री मोदी को तीसरी बार सेवा का मौका देकर भारत की जनता इस दौर का क्विट इंडिया मूवमेंट भी सफल बनाएगी.

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Umesh Solanki

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