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Sikkim flood
– फोटो : Amar Ujala

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सिक्किम की ल्होनक झील टूटने की चेतावनी पिछले करीब दो दशक में प्रकाशित कई वैज्ञानिक शोध और अभियान दे चुके थे। सरकार और गैर-सरकारी एजेंसियों के अध्ययनों में हिमनद झील टूटने से आई बाढ़ (जीएलओएफ) में बड़ी संख्या में लोगों के मौत और नुकसान की आशंका भी जताई गई थी।

इसरो ने 42% हादसे की जताई थी आशंका

2012 में रिमोट सेंसिंग सेंटर के साथ मिलकर भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने चेताया था कि मोरेन (हिमनद से निकले मिट्टी-पत्थर) के बांध से बनी दक्षिण ल्होनक झील में एक नोक बन गई है, यह खतरनाक साबित हो सकती है। आंकड़ा देकर कहा था कि यहां से बाढ़ की आशंका 42 प्रतिशत है और झील की नोक टूटी तो 586 घनमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पानी बह निकलेगा।

सरकार की रिपोर्ट ने भी चेताया था

2016 में सरकार के विज्ञान व तकनीकी विभाग ने एनजीओ की मदद से तैयार की रिपोर्ट में झील से आपदा की आशंका जताई थी। सरकारी कॉलेज के सहायक प्रो. दिल्लीराम दहल बताते हैं कि इसके बाद सरकार ने झील में पाइप लगाकर पानी को नियंत्रित ढंग से निकालने का इंतजाम किया, लेकिन यह नाकाफी रहा।



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Umesh Solanki

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