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Russia-China Relation: रूस और चीन यूं तो पहले भी मित्र थे, लेकिन यूक्रेन से युद्ध के बाद इनकी दोस्ती और गहरी हो गई है. खबर है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस सप्ताह चीन पहुंचेंगे और बीजिंग में चीनी नेताओं से मिलेंगे. हालांकि पुतिन की इस यात्रा की पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन चीनी अधिकारियों का दावा है कि वह सोमवार (16 अक्टूबर को) देर रात तक बीजिंग पहुंचेंगे.

अगर रूसी राष्ट्रपति बीजिंग पहुंचते हैं और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलते हैं तो यह मुलाकात यूक्रेन में युद्ध के दौरान मॉस्को के लिए चीन के आर्थिक और राजनयिक समर्थन को रेखांकित करता है. दोनों देशों ने संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके मित्र देशों के खिलाफ एक अनौपचारिक गठबंधन बनाया है, जो अब इज़राइल-हमास युद्ध के बाद से और चर्चा में आ गया है. आइए जानते हैं पुतिन के इस दौरे के रूस के लिए क्या मायने हैं.

खास मौके पर जा रहे हैं पुतिन

पुतिन इस यात्रा के दौरान बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) की घोषणा की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर होने वाली सभा में सर्वोच्च प्रोफ़ाइल वाले मेहमानों में से एक होंगे. उनका इस कार्यक्रम में शामिल होना एक तरह से इस प्रोजेक्ट को समर्थन देने जैसा है. पत्रकारों की ओर से चीन की यात्रा के बारे में पूछे जाने पर पुतिन ने कहा कि इसमें बेल्ट और रोड से संबंधित परियोजनाओं पर बातचीत भी शामिल होगी.  उन्होंने कहा कि मॉस्को पूर्व सोवियत संघ देशों के आर्थिक गठबंधन की ओर से किए गए प्रयासों से जुड़ना चाहता है जो ज्यादातर मध्य एशिया में स्थित हैं.”

वित्तीय संबंधों पर होगी खुलकर बात

पुतिन ने कहा कि वह और शी जिनपिंग मॉस्को और बीजिंग के बीच बढ़ते आर्थिक और वित्तीय संबंधों पर भी चर्चा करेंगे. हम दोनों देशों के बीच वित्तीय संबंध और राष्ट्रीय मुद्राओं में भुगतान की दिशा में काम करेंगे. इसके अलावा दोनों देश ऊर्जा क्षेत्र में उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों को लेकर बात करेंगे.

चीन रूसी वस्तुओं के लिए बड़ा बाजार

कार्नेगी रूस यूरेशिया सेंटर के निदेशक अलेक्जेंडर गैब्यूव का कहना है कि चीन को जहां रूस से फायदा है, वहीं रूस को भी चीन से कई पहलुओं पर मदद मिल रही है. रूस के लिए चीन यूक्रेन के खिलाफ क्रूर दमन में उसकी लाइफ लाइन और आर्थिक लाइफ लाइन है. चीन रूसी वस्तुओं के लिए प्रमुख बाजार है, यह एक ऐसा देश है जो बाहरी दुनिया के साथ रूस के व्यापार को व्यवस्थित करने के लिए अपनी मुद्रा और भुगतान प्रणाली प्रदान करता है.

सैन्य गठबंधन की सभावना है कम

गबुएव ने कहा कि हालांकि मॉस्को और बीजिंग के लिए पूर्ण सैन्य गठबंधन बनाने की संभावना नहीं होगी, लेकिन उनका रक्षा सहयोग बढ़ेगा. दोनों के सैन्य गठबंधन न बनाने के पीछे की वजह ये है कि दोनों देश सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर हैं. इसके अलावा दोनों मिलकर मिसाइल डिफेंस सिस्टम विकसित करने के लिए अधिक संयुक्त प्रयास करेंगे.

यूक्रेन पर हमले के बाद से बेहतर संबंध 

फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण आक्रमण से कुछ हफ्ते पहले, पुतिन ने बीजिंग में शी से मुलाकात की थी और दोनों पक्षों ने “कोई सीमा नहीं” रिश्ते का वादा करते हुए एक समझौते पर साइन किए थे. तब बीजिंग ने रूस और यूक्रेन युद्ध में खुद को तटस्थ दिखाने की कोशिश की थी और कई बार दोनों देशों के बीच बातचीत कराने का प्रस्ताव रखा था.

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Umesh Solanki

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