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योचेवेद लिफशिट्ज
– फोटो : Social Media

विस्तार


इस्राइल हमास युद्ध पिछले तीन सप्ताह से जारी है, जिसमें 6500 लोगों की मौत हो गई। इस दौरान हमास ने सैकड़ों लोगों को बंदी बना लिया, जहां उन पर आतंक बरपाया जा रहा है। हालांकि, दो अमेरिकी नागरिकों की रिहाई के बाद हमास आंतकियों ने दो इस्राइली बंधकों को भी मुक्त कर दिया है। वापस अपने परिजनों से मिलने के बाद 75 साल के योचेवेद लिफशिट्ज भावुक हो गईं। उन्होंने हमास द्वारा बनाए नरक के बारे में बताया कि कैसे आंतकियों ने उनके साथ-साथ अन्य बंधकों की जिंदगी को जहन्नुम बना दिया है। हालांकि, रिहा हुई महिला का कहना है कि आतंकियों का व्यवहार बाद में चलकर अच्छा हो गया था। बता दें, महिला का पति अब भी आंतकियों की कैद में हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लिफशिट्ज के साथ-साथ नुरित कूपर को भी हमास ने रिहा किया है। अस्पताल में भर्ती लिफशिट्ज ने बताया कि हमारे घरों पर आंतकियों ने हमला किया। हमें पीटा और फिर मुझे मेरे पति के साथ बंदी बना लिया। उन्हें इस बात की फिक्र नहीं कि कौन जवान है, कौन बुजुर्ग और कौन बच्चा। उन्हें बस मारपीट करना है। मेरे पति ओडेड (87) अब भी गाजा में बंधक हैं।

हमें लाठियों से पीटा

लिफशिट्ज ने कहा कि आतंकी उन्हें अपनी बाइक पर बिठाकर गाजा ले गए। वहां उनकी घड़ी और गहने उतरवा दिए। इसके बाद उन्हें लाठियों से पीटने लगे। आतंकियों ने उन्हें इतना मारा कि उनकी पसलियां भी टूट गईं, जिसके बाद उन्हें दर्द से कहरता ही वहां छोड़ दिया। हालत इतनी खराब हो गई थी कि सांस लेने में भी परेशानी होने लगी। घंटों तक उन्हें सुरंगों में चलाया गया। इसके बाद उन्हें एक बड़े से कमरे में लेकर गए, जहां पहले से ही करीब 25 लोग बंद थे। इसके बाद उन्हें अलग एक कमरे में बंद कर दिया, जहां चार लोग ही थे।

फलस्तीनी लोगों का इलाज करते हैं पति

लिफशिट्ज ने बताया कि हमें जिस कमरे में रखा गया, उसके गार्ड से उनके साथ अच्छा व्यवहार किया और दवाईयां भी दीं। हमें दिन में एक बार पनीर, खीरा और पीटा दिया जाता था। उनके पति सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो फलस्तीनी मरीजों का इलाज करते थे। महिला का कहना है कि वह राजनीति के बारे में बात नहीं करना चाहती। 

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Umesh Solanki

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