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भूकंप के बाद का मंजर
– फोटो : सोशल मीडिया



विस्तार


नेपाल में शुक्रवार रात आए भूकंप के बाद तबाही के मंजर लोगों को डरा रहे हैं। यही वजह है कि पश्चिमी नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लोग अभी भी कड़ाके की ठंड में सड़कों पर रात गुजार रहे हैं। दरअसल लोग भूकंप से इतना डर गए हैं कि अभी भी अपने घरों के भीतर जाने से डर रहे हैं। जाजरकोट जिले में नलगढ़ नगर पालिका में रहने वाले लोग अभी भी सड़कों पर रह रहे हैं। 

नेपाल में अभी भी आ रहे भूकंप के झटके

बता दें कि शुक्रवार की रात नेपाल की राजधानी काठमांडू से 500 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में स्थित जाजरकोट और रुकुम जिले में आए भूकंप में अब तक 157 लोगों की मौत हो चुकी है। भूकंप में 253 लोग घायल भी हुए हैं। जाजरकोट जिला भूकंप का केंद्र था। साल 2015 में आए भूकंप के बाद यह नेपाल का सबसे खतरनाक भूकंप था। भूकंप के चलते हजारों घर तबाह हो गए हैं। नेपाल में भूकंप का अध्ययन करने वाले केंद्र नेशनल अर्थक्वेक मॉनिटरिंग एंड रिसर्च सेंटर का दावा है कि शनिवार से अभी तक नेपाल में 159 छोटे-बड़े झटके आ चुके हैं। नेपाल की सरकार भूकंप प्रभावित इलाकों में सैन्य हेलीकॉप्टर्स के जरिए राहत सामग्री की सप्लाई कर रही है। 

विदेशी मदद नहीं लेगा नेपाल!

शनिवार को नेपाल के पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड ने भूकंप प्रभावित इलाकों का दौरा भी किया और भूकंप से हुए नुकसान का जायजा लिया। नेपाल की सरकार ने कहा है कि वह विदेशी मदद लेने के लिए अभी जल्दबाजी नहीं कर रही है और वह खुद इस आपदा से निपटने में सक्षम है। नेपाल सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि देश इस संकट से निपटने में सक्षम है। 

रविवार को नेपाल के पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड ने कैबिनेट की बैठक बुलाई और इस बैठक में भूकंप पीड़ितों को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया। सरकार ने दोनों भूकंप प्रभावित राज्यों को 5-5 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद देने का एलान किया है। नेपाल ने राहत और बचाव कार्यों में करीब 4000 जवानों को तैनात किया है। 

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Umesh Solanki

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