
जमीन संरक्षित होने से वार्ड में होंगे विकास कार्य
वैशाली नगर विस क्षेत्र में भू माफिया का बोलबाला
भिलाई,
नगर पालिका निगम कैलाश नगर कुरुद वार्ड नं. 21 की पार्षद नेहा साहू ने आज समस्त मोहल्ले वासियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर कैलाश नगर में स्थित शासकीय भूमि को बचाने के लिए मैदान मैं उतर गई हैं.
कैलाश नगर मानसरोवर मंदिर के पास खसरा क्रमांक 1591,1592 एवं 1593 जोकि भू अभिलेख में शासकीय भूमि के रुप में दर्ज है. वर्ष 2003 में मोहल्ले वासियों की मांग पर पार्षद नेहा साहू द्वारा नगर निगम भिलाई के माध्यम से सामुदायिक भवन हेतु निविदा जारी की गई थी. वर्ष 2003 में राज्य शासन बदलने के कारण उक्त निविदा निरस्त कर दी गई. यह भूमि मोहल्ले के बीच एवं मंदिर के पास होने के कारण मोहल्लेवासियों द्वारा पार्षद तथा जन प्रतिनिधियों से लगातार सामुदायिक भवन मांग हो रही थी. क्योंकि बिना रजिस्ट्री के मूल दस्तावेज के शासकीय भूमि पर सीमांकन किया जा रहा था.पार्षद नेहा ने आगे बताया कि वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र में भू माफिया सक्रिय हैं. आशा वैष्णव एवं सुनील कश्यप बडे भू माफिया हैं. मेरे द्वारा 1 दिसंबर से 6 दिसंबर तक मोहल्ले वालों के साथ धरना दिया गया. तब जाकर प्रशासन जागा. सीमांकन की कार्यवाही हुई जिसमें 80% शासकीय भूमि थी. हमारा उद्देश्य है कि यदि शासकीय भूमि है वहां पर विकास कार्य जनता के लिए होना चाहिए, जिसमें गार्डन, सामुदायिक भवन जैसी मूलभूत सुविधाएं जनता को मिलना चाहिए. जो जनता का नैतिक अधिकार है. हमने सभी दरवाजे खटखटाए जिसमें कलेक्टर निगम आयुक्त एवं तहसीलदार हैं.लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तब हमने मोहल्ले वालों के साथ धरना दिया. हर बार सीमांकन रुकवाने एवं कार्यवाही में व्यवधान डालने भू माफिया इस शासकीय भूमि के लिए सक्रिय दिखे. आशा वैष्णव और सुनील कश्यप जमीन संबंधी दस्तावेज अभी तक प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं. आशा के पिता के द्वारा 50 वर्षों से काबिज लोगों को प्लॉट बेचे थे आज 20 से 30 ऐसे घर हैं जिन्हें तहसीलदार द्वारा शासकीय भूमि पर बनाया हुआ बताया गया है. भू माफियाओं के कारण एवं उनके दबाव के चलते सीमांकन की कार्यवाही भी पूर्ण नहीं हो पा रही थी. जबकि शासन का भुइंया एप मैं शासकीय भूमि चिन्हांकित है. 10 एकड़ जमीन तीन खसरे में विभक्त है. हाउसिंग बोर्ड और सामान्य नागरिक के अलावा हाउसिंग बोर्ड के घर भी यहां बन गए हैं. रोड रास्ता नाला भी नक्शे में क्लियर है. आशा वैष्णव ने वर्ष नवंबर माह में अतिरिक्त तहसीलदार द्वारा दिया गया तलवाना लेने से इनकार कर दिया. जिस वजह से कार्यवाही 6 महीने लेट हुई. अवैध कब्जा होने पर स्थानीय लोगों द्वारा विरोध किया गया. सुनील कश्यप ने कहा कि मेरे द्वारा आशा वैष्णव से जमीन को खरीद लिया हूँ.लेकिन दोनों व्यक्ति अपने जमीन से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पा रहे. ऐसा नेहा साहू ने बताया. आज 50 वर्षों से काबिज लोग जिन्होंने अपना घर बना लिया है उनके पास सारे दस्तावेज हैं. वे अब कहां जाएंगे. पुराने नक्शे के हिसाब से घर का निर्माण किए हैं लेकिन सरकारी तंत्र पुराने नक्शे को न मानकर नए नक्शे के हिसाब से 20 30 घरों को शासकीय भूमि पर बना हुआ बता रहा है. जिस वजह से मोहल्ले वासी अब कलेक्टर एवं तमाम जांच एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं. रहवासियों के दस्तावेज बिना जांचे सरकारी महकमें की कार्यवाही न्यायोचित नहीं है. सरकारी महकमें के लोग यह भी कह रहे हैं जो घर शासकीय भूमि पर बने हैं शासन को जब जमीन की जरूरत पड़ेगी वह उनसे खाली करवा लेंगे. स्थानीय रहवासी जिनके घर पक्के बने हैं वह काफी दहशत में हैं. अपनी एवं सरकारी जमीन बचाने सरकार से अपील कर रहे हैं. नेहा ने कहा कि क्षेत्र में किसी प्रकार का ला एवं ऑर्डर ना बिगड़े इसके लिए मैं शासन प्रशासन से मांग करती हूं कि शासकीय भूमि को भू माफिया से बचाकर उच्च स्तरीय जांच करें. जो भी इसमें शामिल हैं उन पर एफ आई आर भी दर्ज करें. हालत यह है कि कोहका, कुरुद, कैलाश नगर में भू माफियाओं का राज है. एक ही जमीन पर तीन लोगों की दावेदारी के बोर्ड लगे हैं. सरकारी तंत्र भी इस जमीन को अपना बता रहा है. जिला प्रशासन लंबे समय से मामले की जांच कर रहा है, दूसरी ओर पुलिस प्रशासन राजस्व का मामला बताकर पल्ला झाड रहा है. तहसीलदार ने बताया कि सीमांकन के दौरान पाई गई शासकीय भूमि को संरक्षित किया जायेगा एवं निजी खसरों की वस्तु स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण पाई गई निजी भूमि की जांच पूर्ण होने तक संपूर्ण क्षेत्र की स्थिति यथावत रहेगी. पत्रकार वार्ता में उपस्थित लोगों में विक्रांत सिंह, जगमोहन सिंह, अशोक प्रसाद, चंदन शर्मा, टीलेंद्र नागदेवे, उत्पल,देवेश सिंह, विनय सिंह, नितेश सिंह,डीपी शर्मा, टिकेश्वर साहू सहित मोहल्ले वासी मौजूद थे.