भिलाई ,
दिनांक: 21/12/2025
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 58वें प्रदेश अधिवेशन का द्वितीय दिवस आज भिलाई स्थित कला मंदिर “भगवान बिरसा मुंडा नगर” में सम्पन्न हुआ. जिसके पहले सत्र में मुख्य रूप से उपस्थित मध्य क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री चेतस सुखड़िया जी ने “वन्देमातरम राष्ट्रभक्ति की अमर पुकार” के विषय पर भाषण हुआ तत्पश्चात अगले सत्र में सभी प्रस्तावक द्वारा सभी प्रस्ताव के सुझाओं को सम्मिलित कर प्रदेश अध्यक्ष डॉ विकास पंडित सर को सौंपा, जिसके बाद ॐ की ध्वनि के साथ सभी कार्यकर्ताओं ने प्रस्ताव पारित किया ,अगले सत्र में प्रदेश अधिवेशन में व्यवस्था के कार्यकर्ताओं का परिचय कराया गया प्रदेश मंत्री श्री अनंत सोनी द्वारा आगमी कार्यक्रमों की घोषणा की गई एवं प्रदेश अध्यक्ष द्वारा अभाविप छत्तीसगढ़ प्रदेश सत्र 2025-26 की नवीन कार्यक्रम की घोषणा की गई जिसके बाद प्रदेश संगठन मंत्री श्री महेश साकेत द्वारा पूरे अधिवेशन का समरूप किया जिसके बाद प्रदेश अध्यक्ष एवं मंत्री द्वारा ध्वजावतरण एवं वन्देमातरम गीत के साथ अधिवेशन औपचारिक रूप से सप्तम हुआ।
श्री चेतस सुखड़िया जी ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, छत्तीसगढ़ प्रदेश द्वारा वर्ष 2005 में “ बांग – बांग ” कार्यक्रम का आयोजन किया गया था उसी समय से यह संकल्प लिया गया कि विद्यार्थी परिषद का प्रत्येक कार्यकर्ता जब भी किसी से मिले, तो “वंदे मातरम्” कहकर ही अभिवादन करे। “वंदे मातरम्” के रचयिता श्री बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जी हैं तथा यह गीत पहली बार कोलकाता में आयोजित कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था। तमिलनाडु के सुप्रसिद्ध नेता श्री सुब्रमण्यम नायडू ने इसका तमिल भाषा में अनुवाद किया स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनेक क्रांतिकारियों के फांसी के फंदे पर चढ़ते समय भी अंतिम शब्द “वंदे मातरम्” ही रहे, अंग्रेज जानते थे कि क्रांति की शुरुआत तलवार से नहीं, बल्कि भावनाओं से होती है, इसी कारण उन्होंने “वंदे मातरम्” के गान पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया। बावजूद इसके, ब्रिटिश शासन इस गीत को रोकने में असफल रहा। जेल जाते समय भी क्रांतिकारी “वंदे मातरम्” का उद्घोष करते थे और विद्यार्थी इसे पूरे गर्व से गाते थे। उस समय “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि जन-जन की भावनात्मक शक्ति बन चुका था। उन्होंने कहा कि जब भारतीय नौसेना ने पहली बार भारत का ध्वज फहराया, तब भी “वंदे मातरम्” का ही गान हुआ नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने “वंदे मातरम्” को भारत का युद्ध गीत बताया “वंदे मातरम्” बोलने का अर्थ केवल अभिवादन नहीं, बल्कि यह भावना व्यक्त करना है कि “हे भारत माता, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ; तुम्हारे लिए जी भी सकता हूँ और आवश्यकता पड़ी तो मर भी सकता हूँ ” श्री सुखड़िया जी ने कहा कि “वंदे मातरम्” अध्यात्म और देशभक्ति का अद्भुत संगम है। 4 फरवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता प्रदान की गई। उन्होंने यह नारा भी दिया “हम सब भारत माँ के लाल, भेदभाव का कहाँ सवाल।”उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम्” का अर्थ केवल भारत माता को प्रणाम करना नहीं है, बल्कि यह वचन देना भी है कि हम उसकी रक्षा करेंगे। जब-जब “वंदे मातरम्” का गान होगा, तब-तब भारत की आत्मा और प्रत्येक नागरिक नई ऊर्जा से भर उठेगा। अंत में उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में जाकर “संपूर्ण वंदे मातरम्” का सामूहिक गान करें और इस राष्ट्रभाव को जन-जन तक पहुँचाएँ।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद छत्तीसगढ़ 58वें प्रदेश अधिवेशन में तीन प्रस्ताव पारित हुए, प्रस्ताव क्रमांक 01 गुणवत्तायुक्त, रोजगारपूर्वक शिक्षा हेतु ठोस कदम उठाए सरकार , प्रस्ताव क्रमांक 02 नशा मुक्त , नक्सल मुक्त समरस छत्तीसगढ़ हो रजत जयंती वर्ष का संकल्प, प्रस्ताव क्रमांक 03 हमारी लोक परंपराएं ही स्वस्थ वातावरण और स्वस्थ समाज का मूल इन तीन प्रस्ताव को सभी कार्यकर्ता के सुझावों को सम्मिलित करते हुवे प्रस्ताव को ऊँ की ध्वनि से सर्व सहमति से पारित किया गया। जिसके पश्चात प्रदेश मंत्री श्री अनंत सोनी द्वारा आगमी कार्यक्रमों की घोषणा की गई जिसमें पूरे वन्देमातरम गीत का गान विद्यालय एवं महाविद्यालयो में कार्यक्रम करना , 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस संगोष्ठी , छात्रावास सर्वेक्षण अभियान, संघ शताब्दी वर्ष जैसे कार्यक्रमों की घोषणा की