
निगम आयुक्त का फरमान वेतन के लिए हमें उद्योगों से चाहिए निर्यात कर
डिप्टी सीएम उद्योग मंत्री एवं सांसद से उद्योगपति लगा चुके हैं गुहार
14 निकायों में भिलाई निकाय का यह है तुगलकी फरमान
भिलाई,
भिलाई निर्यात कर संघर्ष समिति के अध्यक्ष संदीप अग्रवाल ने आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि हमारा यह संगठन एवं उनके सदस्य औद्योगिक संगठन भिलाई क्षेत्र में काम करते हैं. हमारे साथ हजारों श्रमिक भी काम कर रहे हैं. 14 निकायों में एक तुगलकी फरमान नगर निगम भिलाई के द्वारा 2017 से आज तक का निर्यात कर का टैक्स सभी ट्रेडर्स उद्योगपतियों से वसूला जा रहा है, जो कि सरासर गलत है. चूंकि आयुक्त राजीव पांडे का स्पष्ट कहना है कि हम अपने निकाय के कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रहे हैं, इसलिए हम उद्योगपतियों से वर्ष 2017 से आज तक का निर्यात कर वसूल कर रहे हैं. यदि उद्योगपतियों को तकलीफ है तो वे इस मामले में सीधे राज्य सरकार से अपनी गुहार लगा सकते हैं.उसके लिए बाकायदा व्यापारियों को नोटिस के साथ-साथ कुर्की करने का आदेश भेजा जा रहा है, जिससे व्यापारी वर्ग काफी भयभीत है. पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में यदि निर्यात कर राज्य सरकार लागू करती है तो हमें भी देने में कोई आपत्ति नहीं होगी, लेकिन इस तरह का निगम भिलाई का तुगलकी फरमान से व्यापारी एवं उद्योगपति अपने-अपने उद्योग में ताला लगाने के अलावा कोई चारा उनके पास नहीं बचा है. निर्यात कर की बैक डेट से वसूली निकालना सरासर गलत है. व्यापारियों को 500 से लेकर 5 करोड़ तक का नोटिस भेजा जा रहा है. इस संबंध में डिप्टी सीएम एवं नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव, सांसद विजय बघेल के अलावा उद्योग मंत्री से भी हम मिलकर इस निर्यात कर के संबंध में अपनी बात रख चुके हैं. लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम प्राप्त नहीं हुआ है. दुर्ग सांसद विजय बघेल को उद्योगपतियों द्वारा दो बार ज्ञापन सौंपा गया है. उन्होंने आयुक्त भिलाई को निर्देशित किया है कि निर्यात कर के मामले में वे पुनर्विचार करें और व्यापारियों को राहत दें. सांसद श्री बघेल ने आगे व्यापारियों को आश्वस्त किया कि जरूरत पड़ी तो वे प्रदेश के मुखिया एवं सीएम विष्णु देव साय से सीधे मुलाकात कर इस निर्यात कर के मामले में व्यापारियों को राहत दिलाने की पहल करेंगे. अभी वर्तमान में सांसद बघेल ने मुख्यमंत्री, कलेक्टर दुर्ग को निर्यात कर के मामले में अपना पत्र भेजा है. क्योंकि भिलाई के कई उद्योग पिछले 20-25 सालों से संचालित हैं अभी और कुछ उद्योग हाल फिलहाल में नए संचालित होने प्रारंभ हुए हैं. स्माल इंडस्ट्रीज को निर्यात कर से छूट दी गई है. पूरे भारत सहित छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर निगम में ही निर्यात कर उद्योगपतियों से वसूला जा रहा है. इसे उपस्थित उद्योगपतियों ने तुगलकी फरमान बतलाया. जरूरत पड़ी तो हम उद्योगों में तालाबंदी करेंगे एवं कोर्ट का रास्ता अख्तियार करेंगे. निर्यात कर के मामले में यदि हम ग्राहक से अतिरिक्त पैसा लेते हैं तो ग्राहक पर सीधे तौर पर भार पड़ेगा, हम व्यापारी अपनी जेब से क्यों दें. निर्यात कर के मामले में हम जल्दी महापौर नीरज पाल से भी मिलेंगे. वर्तमान में बीएसपी निर्यात कर नगर निगम भिलाई को पटा रहा है. पहले यह निर्यात कर 100 करोड रुपए से ऊपर टर्नओवर वाले उद्योगपतियों को ही लगता था. हमारे द्वारा निर्यात कर के मामले में नगर निगम भिलाई में आरटीआई लगाया गया है लेकिन उसकी भी जानकारी हमें नहीं दी जा रही है. यह निर्यात कर टैक्स लगाना गलत है. उद्योगपति एकजुट है. उन्हें परेशान ना करें. गलत तरीके से टैक्स वसूली न की जाए. व्यापारी व उद्योगपति इस मामले में किसी भी तरह की राजनीतिक नहीं करना चाहते हैं. सुशासन की सरकार में बैठे नौकरशाह का सकारात्मक रवैया उद्योगपतियों के पक्ष में नहीं है.
नगर निगम भिलाई द्वारा लगाए जा रहे अन्याय पूर्ण एक्सपोर्ट टैक्स के विरोध में भिलाई के सभी प्रमुख औद्योगिक व्यापारिक संगठन जिनमें स्टील चैंबर भिलाई, छत्तीसगढ़ वायर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, भिलाई वायर ड्राइंग संगठन, एन्सीलरी संगठन, लघु उद्योग भारती, छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, एवं समस्त लघु उद्योग भिलाई एकजुट होकर भिलाई निर्यात कर संघर्ष समिति बैनर तले विरोध दर्ज करेंगे. जीएसटी की भावना के यह विपरीत कदम है. देश में वन नेशन वन टैक्स की व्यवस्था लागू होने के बाद, एंट्री टैक्स व आक्ट्राय जैसे स्थानीय कर समाप्त किए गए थे. ऐसे में नगर निगम भिलाई के द्वारा निर्यात कर लगाना केंद्र सरकार के निर्यात प्रोत्साहन नीति और जीएसटी व्यवस्था की मूल भावना का उल्लंघन है. निगम के पास इनपुट टैक्स क्रेडिट होने की कोई व्यवस्था न होने के कारण यह कर सीधा उद्योगों की लागत बढाता है. इस कर की वसूली तत्काल प्रभाव से रोकी जाये. एक्सपोर्ट टैक्स जैसे किसी भी कर को जीएसटी के ढांचे से बाहर ना रखा जाय. उद्योग एवं व्यापारिक संगठनों के साथ औपचारिक परामर्श के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए. जीएसटी की राष्ट्रीय कमेटी की मासिक मीटिंग में इस मामले को चर्चा हेतु रखा जाए. वसूली का दवाब एवं कुर्की की धमकी यदि जारी रही तो भिलाई के सभी उद्योग संयुक्त रूप से अपने प्रतिष्ठान बंद कर प्रशासन को चाबी सौंपने के लिए बाध्य होंगे. बल्कि रोजगार औद्योगिक विकास और इस ऑफ़ डूइंग बिजनेस के लिए घातक साबित होगी. पीएम नरेंद्र मोदी 5 ट्रिलियन इकोनामी और जीएसटी 2.0 का विजन जहां करो को सरल एवं न्याय संगत बनाने की दिशा में है वहीं नगर निगम भिलाई का यह कदम इस विजन के विपरीत और अव्यावहारिक है.
इस पत्र वार्ता में उपस्थित लोगों में उद्योगपति विष्णु अग्रवाल, अरविंदर सिंह खुराना, पुरुषोत्तम अग्रवाल, राहुल बंसल, अतुल गर्ग सहित 50 से अधिक उद्योगपति उपस्थित थे.