दुर्ग में कांग्रेस का अनोखा ‘मुसवा (चूहा) बारात’ बना चर्चा का केंद्र
नाचते-गाते चूहे, मंत्रियों की बारात निकाल अधिकारियों को सौंपा गया पिंजरे में चूहा , नारों से गूंजा कलेक्टर कार्यालय
दुर्ग,

छत्तीसगढ़ राज्य में सरकारी गोदामों में रखे करोड़ों रुपये मूल्य के धान के कथित रूप से “मुसवा (चूहा)” द्वारा नष्ट किए जाने के भाजपा सरकार के दावे ने पूरे प्रदेश को आक्रोशित कर दिया है। किसानों की मेहनत और खून-पसीने की कमाई को लेकर सरकार जिस तरह चूहों को जिम्मेदार ठहरा रही है, वह जनता की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास मात्र है।

इसी जनविरोधी और किसान-विरोधी नीति के खिलाफ जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के नेतृत्व में 20 जनवरी 2026, मंगलवार को दुर्ग में एक ऐतिहासिक, प्रतीकात्मक और बेहद रोचक “मुसवा (चूहा) प्रदर्शन” आयोजित किया गया।
प्रदर्शन राजीव भवन दुर्ग से कलेक्टर कार्यालय दुर्ग तक ढोल-नगाड़ों, नारों और प्रतीकात्मक झांकियों के साथ निकाला गया।
इस प्रदर्शन का सबसे आकर्षक केंद्र “चूहा झांकी” रही, जिसमें मुसवा (चूहे) के रूप में सजे कार्यकर्ता नृत्य करते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। झांकी में चूहे अपने हाथों में धान लिए हुए नजर आए, जो यह दर्शाता रहा कि भाजपा सरकार धान घोटाले की जिम्मेदारी चूहों पर थोप रही है, जबकि सच्चाई कुछ और ही है।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस पार्टी द्वारा चार नग चूहे भी प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए। इन चूहों के ऊपर छत्तीसगढ़ सरकार के 14 मंत्रियों के नाम लिखे हुए थे, जिससे यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि “धान चूहों ने नहीं, बल्कि भाजपा सरकार के 14 मंत्री ही धान घोटाले के असली जिम्मेदार हैं।”
प्रतीकात्मक रूप से चूहों को सौंपते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि सरकार मानती है कि धान चूहों ने खाया है, तो यही चूहे सरकार को सौंपे जा रहे हैं—अब सरकार इनसे जवाब ले।
कलेक्टर कार्यालय परिसर में प्रदर्शन को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, फिर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश, नारेबाजी और किसान आक्रोश साफ दिखाई दिया। नाचते-गाते चूहों और मंत्रियों की प्रतीकात्मक बारात ने आम जनता और मीडिया का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
जिलाध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग ग्रामीण राकेश ठाकुर ने कहा की “धान किसानों की मेहनत की कमाई है। ‘चूहा खा गया’ कहना भाजपा सरकार की नाकामी और भ्रष्टाचार को छुपाने की कोशिश है। सच्चाई यह है कि धान मुसवा ने नहीं, बल्कि भाजपा सरकार और उसके मंत्रीगणों ने खा लिया है। आज हमने प्रतीकात्मक रूप से वही चूहे सरकार को सौंप दिए हैं, जिनके नाम पर यह घोटाला छुपाया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा धान खरीदी की समय-सीमा नहीं बढ़ाई जा रही है और टोकन व्यवस्था को जानबूझकर सीमित रखा गया है, जिससे लगभग 20 प्रतिशत धान की खरीदी नहीं हो पाएगी। यह भाजपा सरकार की पूर्व नियोजित साजिश है, जिसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र साहू ने कहा कि अगर चूहे ही धान खा गए हैं, तो गोदामों की जिम्मेदारी किसकी है? अधिकारी और मंत्री किस लिए हैं? आज चूहों की झांकी ने भाजपा सरकार की असलियत जनता के सामने ला दी है, यह धान घोटाला केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि किसानों के आत्मसम्मान पर हमला है। चूहों के नाम पर धान गायब करना भाजपा सरकार की बौखलाहट और भ्रष्टाचार का सबूत है।”
कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर ने धान खरीदी पर कहा कि “टोकन की कमी और समय-सीमा की बाधा के कारण किसान अपना पूरा धान बेच नहीं पा रहा है। भाजपा सरकार किसानों को जानबूझकर नुकसान पहुंचा रही है, लेकिन कांग्रेस किसानों की इस लड़ाई को अंतिम दम तक लड़ेगी।”
प्रदर्शन के पश्चात दुर्ग कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें करोड़ों के धान घोटाले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों एवं मंत्रियों पर कड़ी कार्रवाई, किसानों का शत-प्रतिशत धान खरीदी सुनिश्चित करने, टोकन लिमिट तत्काल बढ़ाने तथा धान खरीदी की समय-सीमा में विस्तार की प्रमुख मांगें रखी गईं।
कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भाजपा सरकार ने किसानों की मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को प्रदेशव्यापी और उग्र रूप दिया जाएगा।
यह “मुसवा प्रदर्शन” भाजपा सरकार की विफलता, भ्रष्टाचार और किसान-विरोधी मानसिकता का प्रतीक बनकर सामने आया है। पूर्व विधायक अरुण वोरा, दुर्ग शहर अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल, प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र साहू, जितेंद्र साहू, महापौर निर्मल कोसरे, किसान कांग्रेस अध्यक्ष पुकेश चंद्राकर, देवेंद्र देशमुख, मोहन साहू, मनहरण यादव, श्रीकांत वर्मा, उमेश साहू, संतोष बाफना, कमलेश साहू, शिवकुमार वर्मा, देवेंद्र चंद्रवंशी, महेंद्र वर्मा, रिवेंद्र यादव, राकेश हिरवानी, राजीव गुप्ता, विक्रांत अग्रवाल, पुष्पा यादव, योगिता चंद्राकर, शमशीर कुरैशी, बैकुंठ महानंद, राजेंश्वर सोनकर, हरीश ठाकुर, धर्मेंद्र साहू, घनश्याम साहू, महेंद्र साहू, पुनीत साहू, अमित ठाकुर , प्रताप चंद्राकर, विकास वर्मा, तोरण साहू, राजा घिघोड़े, भेष सोनकर, मनीष साहू, दिनेश वर्मा ,मनीष यादव, संदीप निर्मलकर, प्रमोद राजपूत, विजय वर्मा, लेखराम साहू, संतोष बाफना, कैलाश नाहटा, उमेश साहू, ओनी महिलांग, हीरा वर्मा, लष्मी साहू, डिकेंद्र हिरवानी, प्रहलाद वर्मा, निरंजन राजपूत, महेंद्र वर्मा, मोहन साहू, कमलेश साहू, सुनीता चन्नेवार, सरोजनी चंद्राकर, रामप्यारी वर्मा, करीम खान, तौहीद ख़ान,राम सूर्यवंशी,अरुण वर्मा,सतीश धुरंधर, इंद्रजीत यादव, तरणदीप, आशीष वर्मा, डॉ.अशोक देशलहरा, जीत सिंह, पप्पू वर्मा, अभिषेक वर्मा, भूपेन्द्र वर्मा, विनोद सिंह, राजू यादव , परदेशी साहू, विजय यादव, मनीष बंजारे, शिवा साहू , नेहा पटेल, सूर्यकांत, मुरली कृष्णा, जगदीश वर्मा, उमेश बंजारे, धरम बर्रे,अभिषेक जांगड़े, अशोक आडिल, सागर मनीराम, मंजू यादव, जमुना, विनय साहू, लक्ष्मी साहू , शशि सिंह, अनिल देशमुख, जहीर अब्बास, झमीत गायकवाड, राकेश हिरवानी, मुकुंद पारकर, तुलसी साहू, मुकुंद पारकर सहित पांच सौ से ऊपर संख्या में लोग मौजूद थे।