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Telangana Election 2023: तेलंगाना विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ने एक बड़ा दांव चला है. कांग्रेस के अल्पसंख्यकों का घोषणापत्र (Congress Minority Declaration) जारी  किया. ये पार्टी के लिए कितना फायदेमंद होता है ये तो 3 दिसंबर को परिणाम वाले दिन पता लगेगा.

खास बात ये है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद हिमाचल प्रदेश, गुजरात, यूपी, उत्तराखंड, असम, कर्नाटक, बंगाल और बिहार सहित 19 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, लेकिन कांग्रेस ने कहीं माइनॉरिटी डिक्लेरेशन जारी नहीं किया. फिर सवाल ये है कि कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों वाला दांव आजमाने के लिए तेलंगाना को ही क्यों चुना.

तेलंगाना में हिंदू 85.10 फीसद, मुस्लिम 12.70 प्रतिशत और ईसाई 1.30 परसेंट है. वहीं इसके अलावा सिख, जैन और पारसी जैसे तमाम समुदायों की आबादी 0.90 फीसदी हैं. ऐसे में 12.70 फीसद आबादी किसी भी चुनाव के नतीजे पर बड़ा असर डाल सकते हैं. 

लोकसभा चुनाव को लेकर क्या मायने हैं?
अल्पसंख्यक घोषणापत्र का फायदा कांग्रेस को तेलंगाना में मिलता है तो पार्टी इसे टेम्प्लेट के तौर पर 2024 में भी इस्तेमाल करेगी. कांग्रेस के नेता खुद इसकी तरफ इशारा कर रहे हैं.

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि ये सिर्फ विधानसभा का चुनाव नहीं है. आप चाहते हैं कि 2024 में हिन्दुस्तान की गद्दी से वो जालिम हुक्मरान हटें तो सबसे पहले आपके तेलंगाना में ये कर के दिखाना पड़ेगा तब दिल्ली में इसका संदेश जाएगा. 

देश की 543 लोकसभा सीटों में 218 सीटों में हार-जीत में मुस्लिम वोटर्स बड़ी भूमिका निभाते हैं. वहीं 35 सीटें पर मुस्लिम वोटर 30 फीसद से ज्यादा है. इसके अलावा 38 सीटें पर इनकी आबादी 21 से 30 फीसद तक है. साथ ही 145 सीटें ऐसी हैं, जहां कि मुस्लिम आबादी 11 से 20 परसेंट है. 

कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस नेता जफर जावेद ने आलोचना होने को लेकर कहा कि अल्पसंख्यकों में मुस्लिम ज्यादा है, लेकिन इसके तहत तो ईसाई और सिख भी आते हैं. ऐसे में सवाल बिना बात के उठ रहे हैं. 

एआईएमआईएम क्या बोली?
एआईएमआईएम विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि वो जब भी कमजोर होती है तो फसाद करती है. इन्होंने मुस्लिम का इस्तेमाल वोट बैंक के लिए किया है. 

कांग्रेस के अल्पसंख्यकों घोषणापत्र में क्या है?
अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए बजट को बढ़ाकर सालाना 4,000 करोड़ रुपये तक करेगी. कांग्रेस ने इसके अलावा अल्पसंख्यक वर्ग के बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को रियायती दर पर ऋण प्रदान करने के लिए प्रति वर्ष 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान करने का वादा किया. 

पार्टी ने कहा कि वह अब्दुल कलाम तोहफा-ए-तालीम योजना के तहत मुस्लिम, ईसाई, सिख और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं को एम.फिल और पीएचडी की पढ़ाई पूरी करने पर पांच लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी.

घोषणापत्र में इमाम, मुअज्जिन, खादिम, पादरी और ग्रंथी सहित सभी धर्मों के पुजारियों के लिए 10,000 रुपये से 12,000 रुपये का मासिक मानदेय देने की बात कही गई है.  अल्पसंख्यक समुदायों के बेघर लोगों को मकान बनाने के लिए जगह और पांच लाख रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे. 

इसके अलावा माइनॉरिटी डिक्लेरेशन में उर्दू माध्यम के शिक्षकों की विशेष भर्ती करने के अलावा तेलंगाना सिख अल्पसंख्यक वित्त निगम स्थापित करने का वादा किया गया. बता दें कि राज्य में 30 नवंबर को विधानसभा चुनाव है. इस समय राज्य में केसीआर के नेतृत्व में भारत राष्ट्र समिति  (BRS) की सरकार है. 

इनपुट भाषा से भी.

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Umesh Solanki

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