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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, सावन 2023: वंहा का महीना शिव को समर्पित है. शिव का आशीर्वाद पाने के लिए इस महीने में कई लोग 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने जाते हैं। 12 ज्योतिर्लिंग वह बारह मंदिर हैं जहां शिव जी ज्योति स्वरूप में बारह ज्योतिर्लिंग स्वंयभू माने जाते हैं।

मित्रता में से एक ही ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (Omkarishwar Jyotirlinga) है। मध्य प्रदेश में स्थित ओंकारेश्वर को द्वादश ज्योतिर्लिंग में चौथा स्थान प्राप्त है। आइए जानते हैं इस दिव्य ज्योतिर्लिंग की पूजा का धार्मिक महत्व और लाभ।

कैसे पेड नाम ओंकारेश्वर? (ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग तथ्य)

मध्य प्रदेश के इंदौर से करीब 80 किमी दूर नर्मदा नदी के किनारे की एक पहाड़ी पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है। हिल के चारों ओर नदी तट की ओर प्रस्थान है। ये ज्योतिर्लिंग ओंकार अर्थात ॐ का आकार लिए हुए है। इसी कारण से इस ज्योतिर्लिंग को ओंकारेश्वर नाम से बुलाया जाता है। शिव पुराण में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को भगवान लिंग के नाम से भी जाना जाता है।

यहां रात में आते हैं शिव-पार्वती

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को लेकर धार्मिक धार्मिक मान्यता है कि बाबा भोलेनाथ यहां रात्रि में शयन के लिए आते हैं। कहते हैं पृथ्वी पर ये अनोखा ऐसा मंदिर है जहां शिव-पार्वती रोज चौसर पांसे लगते हैं। रात्रि में शयन आरती के बाद यहां प्रतिदिन चौपड़ दिए जाते हैं और गर्भगृह बंद कर दिया जाता है। अगली सुबह ये पासें मिले हुए दोस्त हैं। आश्चर्य की बात यह है कि जिस मंदिर के अंदर रात के समय परिंदा भी नहीं मारा जाता वहां हर दिन चौपड़ पाए जाते हैं।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा (ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग कथा)

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी कथा यहां राजा मांधाता ने इसी पर्वत पर कठोर तपस्या कर भोलेनाथ को बताई थी। परिणाम स्वरूप राजा मांधाता के दर्शन पर भोलेनाथ के शिवलिंग के रूप में यहां मंदिर हो गए। तब से ये पर्वत मांधाता पर्वत कहलाने लगा। कुबेर देव ने भी यहां शिव को अपनी तपस्या से प्रसन्न किया था।

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अस्वीकरण: यहां संस्थागत सूचनाएं सिर्फ और सिर्फ दस्तावेजों पर आधारित हैं। यहां यह जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह के सिद्धांत, जानकारी की पुष्टि नहीं होती है। किसी भी जानकारी या सिद्धांत को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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Umesh Solanki

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