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Space Fuel: अंतरिक्ष में लंबे वक्त तक रहने और स्पेसक्राफ्ट को चलाने के लिए फ्यूल की जरूरत होती है. फिलहाल स्पेस मिशन के लिए फ्यूल को धरती से ही भेजा जाता है. हालांकि, अब वैज्ञानिकों ने ऊर्जा के एक ऐसे सोर्स को तैयार किया है, जो एस्ट्रोनोट्स को लंबे समय तक चंद्रमा पर रहने में मदद करेगा. वेल्स की बांगोर यूनिवर्सिटी ने न्यूक्लियर फ्यूल सेल्स तैयार किए हैं, जो चंद्रमा जैसी जगहों पर ऊर्जा पैदा करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं. 

अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ‘आर्टिमिस प्रोग्राम’ के जरिए चंद्रमा पर 2030 तक बेस बनाना चाहती है. इसके अलावा मंगल ग्रह पर भी इंसानों को बसाने की तैयारी चल रही है. ऐसे में वहां रहने के दौरान ईंधन की जरूरत भी पड़ेगी. अभी तक स्पेस मिशन के लिए ईंधन धरती से ही लेकर जाया जाता है. लेकिन न्यूक्लियर फ्यूल सेल्स के तैयार होने के बाद इसका इस्तेमाल स्पेस के पेट्रोल के तौर पर किया जा सकता है. इससे इंसानों को स्पेस में बसने में भी बड़ी मदद मिलेगी. 

कुछ महीनों में होगा फ्यूल पर टेस्ट

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बांगोर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर साइमन मिडलबर्ग ने कहा कि उनका काम चुनौतीपूर्ण था, मगर ये काफी मजेदार रहा है. बांगोर की टीम को लेकर बात करते हुए प्रोफेसर मिडलबर्ग ने कहा कि वह न्यूक्लियर फ्यूल का अगले कुछ महीनों में टेस्ट करेंगे. चंद्रमा पर तापमान -248 डिग्री सेल्सियस तक कम हो जाता है. ऐसे में वहां पर इंसानों को बसाना मुश्किल है. इस फ्यूल के जरिए गर्मी पैदा कर इंसानों के रहने लायक वातावरण तैयार किया जा सकता है. 

कैसे काम करेगा ये ईंधन?

बांगोर यूनिवर्सिटी ऊर्जा के अन्य स्रोत इस्तेमाल करने के लिए खोज कर रही है. ‘ट्राइसोफ्यूल’ के तौर पर जाने जाने वाले न्यूक्लियर फ्यूल सेल को टेस्टिंग के लिए भेजा गया है. रोल्स रॉयल ने माइक्रो न्यूक्लियर जनरेटर को तैयार किया है, जिसके ईंधन के तौर पर ट्राइसोफ्यूल का इस्तेमाल किया जाएगा. प्रोफेसर मिडलबर्ग ने बताया कि माइक्रो जनरेटर एक पोर्टेबल डिवाइस जैसा है. इसका आकार एक छोटे कार की तरह है. इसे रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है. 

प्रोफेसर ने बताया कि जनरेटर और ट्राइसोफ्यूल की टेंस्टिंग की जाएगी, ताकि चंद्रमा के बेस पर इसका इस्तेमाल किया जा सके. चंद्रमा पर पानी मौजूद होने के सबूत हैं. ऐसे में इसे अंतरिक्ष में इंसानों का बेस बनाया जा सकता है. लेकिन माइनस में तापमान होने की वजह से यहां बेस को गर्म रखना चुनौतीपूर्ण है. ऐसे में माइक्रो जनरेटर के जरिए ऊर्जा पैदा की जाएगी, जो न सिर्फ बेस को गर्म रखेगा, बल्कि उसकी ऊर्जा के स्रोत के तौर पर भी काम करेगा. 

मंगल तक का सफर होगा आसान

नासा समेत सभी स्पेस एजेंसियां चंद्रमा पर बेस बनाकर मंगल तक जाने के प्लान पर काम कर रही हैं. धरती से मंगल तक का सफर काफी चुनौतीपूर्ण है. मगर चंद्रमा के जरिए इस सफर को आसानी से पूरा किया जा सकता है. हालांकि, ऐसा करने के लिए चंद्रमा पर इंसानों का बेस होना जरूरी है. माइक्रो जनरेटर चंद्रमा पर बेस बनाने में मदद करेगा. एक बार यहां बेस बन जाएगा, तो मंगल ग्रह समेत अंतरिक्ष के अलग-अलग हिस्सों में आसानी से सफर पूरा किया जा सकेगा. 

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Umesh Solanki

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