Wednesday, August 17, 2022
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अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश, देश के लिए ठीक नहीें: पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन

RBI के पूर्व गवर्नर की चेतावनी:रघुराम राजन बोले- अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश देश का बंटवारा करा देगी

रघुराम राजन ने फाइनेंशियल क्राइसिस से जूझ रहे श्रीलंका का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि अगर देश में रोजगार पैदा नहीं होगा और अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न किया जाता है तो हालत श्रीलंका जैसी हो जाएगी.

अल्पसंख्यकों के साथ गलत व्यवहार से देश के भीतर पैदा होगी दरार, बोले पूर्व RBI गवर्नर

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने शनिवार को कहा कि अगर अल्पसंख्यकों को देश के सेकेंड क्लास सिटिजन बनाने की कोशिश होगी तो देश के भीतर दरार पैदा होगी. अगर देश के भीतर ऐसे हालात पैदा होते हैं तो विदेशी दखल बढ़ेगा. इससे भारत कमजोर होगा. राजन ने ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस (AIPC) की तरफ से आयोजित 5वें नेशनल कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं. इसका आयोजन छत्तीसगढ़ के रायपुर में किया गया था.

डेवलपमेंट के लिए लिबरल डेमोक्रेसी जरूरी है अपने संबोधन में रघुराम राजन ने लिबरल डेमोक्रेसी के फायदे बताए. उन्होंने कहा कि आर्थिक तरक्की के लिए लोकतंत्र का लिबरल होना जरूरी है. डेमोक्रेसी और इंस्टीट्यूशन जितना मजबूत होगा, देश की उतनी ज्यादा तरक्की होगी. उदारतावाद को लेकर उन्होंने कहा कि इसका मतलब किसी धर्म के खिलाफ नहीं होता है. हर धर्म का सार हर किसी में अच्छाई तलाशना है. उन्होंने कहा कि देश को सत्तावादी नेतृत्व की जरूरत नहीं है. यह डेवलपमेंट का पुराना मॉडल है जिसमें गुड्स एंड कैपिटल पर फोकस किया जाता है. हालांकि, फोकस लोगों पर और आइडिया पर होना चाहिए.

अग्निपथ के उदाहरण से रखी अपनी बात रोजगार के संकट को समझाने के लिए राजन ने अग्निपथ योजना के भारी विरोध का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यह इस बात का संकेत है कि हमारे युवा नौकरियों के लिए कितने भूखे हैं। अभी कुछ समय पहले आपने रेलवे के 35 हजार पदों के लिए 12 लाख 5 हजार आवेदकों को देखा था। अब यह खासतौर पर चिंता की बात है जब भारत में नौकरियों की कमी है और बहुत सारी महिलाएं घर से बाहर काम नहीं कर रही हैं। भारत की महिला श्रम शक्ति की भागीदारी 2019 में जी -20 देशों में सबसे कम 20.3% ही है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री राजन ने कहा, मेरा मानना ​​है कि यह तर्क पूरी तरह से गलत है. यह विकास के पुराने मॉडल पर आधारित है, जो वस्तुओं और पूंजी पर जोर देता है, न कि लोगों और विचारों पर.’’ उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के मामले में देश का खराब प्रदर्शन उस रास्ते को इंगित करता है, जिस पर हमें पुनर्विचार करने की जरूरत है.’’

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Javed Khanhttps://daily-khabar.com
Executive Editor Madhya Pradesh daily-khabar.com Activism for a better world.
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