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अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस भारतीय संविधान में श्रमिकों के हित

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अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस भारतीय संविधान में श्रमिकों के हित

1 मई 2023 अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस भारतीय संविधान में श्रमिकों के हित में उल्लेखित प्रावधान इस प्रकार है

भारतीय संविधान श्रमिकों के हित में उल्लेखित प्रावधान तथा अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन श्रम कानून अधिनियम पारित किए गए हैं समय एवं परिस्थितियों के अनुरूप इसमें संशोधन होते रहे हैं देखा जाए तो श्रम कानून एक सिक्के के दो पहलू हैं
यह नियोजक तथा श्रमिक दोनों के लिए औद्योगिक शांति सद्भावना तथा उत्पादन व उत्पादकता का दायित्व पता है तथा श्रम कानून का परिपालन एक दूसरे के पूरक है भारत में इतने सारे श्रम कानून पारित हुए हैं जिसके बारे में जानकारी प्राप्त करना तथा कानूनों का लाभ लेना कठिन सा प्रतीत होता है

मध्य प्रदेश इंटक के प्रदेश सचिव नरेंद्र मिश्रा ने बताया कि पाठकों की सुविधा की दृष्टि से यहां पर श्रम कानूनों के नाम प्रभावशीलता श्रमिकों की संख्या तथा उनके वेतन सीमा की जानकारी दी जा रही है ताकि उस कानून का लाभ लिया जा सके
एक नजर में इसका स्वरूप इस प्रकार है।


नंबर 1
अधिनियम का नाम औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 है तथा प्रभावशीलता संपूर्ण भारत में तथा एक श्रमिक भी नियोजित होने पर कानून लागू है तथा मुख्य प्रावधान सेवा मुक्त विवाद का संदर्भ लेआप छटनी संसाधन कार्यवाही वंदीकरण रकम वसूली अनुचित सम व्यवहार दंड आदि का प्रावधान रखा गया है।


नंबर दो
मध्य प्रदेश औद्योगिक संबंध अधिनियम 1960 इसमें प्रभावशीलता संपूर्ण मध्यप्रदेश में 100 या अधिक कर्मचारी कार्यरत वाले उद्योग उपक्रमों से संबंधित है इसका मुख्य प्रावधान विवादों को सुनवाई प्रतिनिधि संघ परिवर्तन सूचना समझौते संरा धन हड़ताल या तालाबंदी दंड का प्रावधान है।


नंबर 3
व्यवसाई संघ अधिनियम 1926 से संबंधित प्रभावशीलता क्या है संपूर्ण भारत मैं 7से अधिक सदस्य संघ बना सकते हैं जिस उद्योग में 10 या 100 जो भी कम हो सदस्य होना आवश्यक है इसकी मुख्य प्रावधान श्रमिक संघ का पंजीयन पंजीयक अपील सामान्य निधि का उपयोग दंड आदि का प्रावधान रखा गया है।


नंबर 4
औद्योगिक नियोजन स्थाई आदेश अधिनियम 1946 की प्रभावशीलता क्या है संपूर्ण मध्य प्रदेश 100 या उससे अधिक श्रमिक पर यह कानून लागू है तथा इसका मुख्य प्रावधान अस्थाई आदेश में संशोधन अपील निलंबन विवाद श्रम न्यायालय में इस अधिनियम के तहत कार्यवाही करने व प्राप्त करने का अधिकार है ।


नंबर 5
वेतन भुगतान अधिनियम 1936 का मुख्य प्रभावशीलता क्या है संपूर्ण भारत में कारखाने औद्योगिक स्थापना में लागू हो तथा जहां प्रत्येक कर्मचारी ₹7000 प्रति माह में एक भी कर्मचारी होने पर यह है कानून प्रभाव सील है तथा मुख्य प्रावधान समय पर वेतन कटौती जुर्माना रिकॉर्ड्स रखा जाना प्राधिकार के समक्ष दावा दंड आदि का न्यायालय में प्रकरण दायर कर सुनवाई का अधिकार है।


नंबर 6
न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 का प्रभावशीलता क्या है इसमें भी संपूर्ण भारत में तथा अधिसूचित उद्योगों प्रबंधकों में एक भी कर्मचारी होने पर वह मुख्य प्रावधान न्यूनतम वेतन दरों का निर्धारण एवं पुनरीक्षण सलाहकार समितियां न्यूनतम वेतन का भुगतान रिकॉर्ड से रखना प्राधिकारी के समक्ष दावा दंड आज का प्रावधान श्रम कानूनबनाया गया है।


नंबर 7
बोनस भुगतान अधिनियम 1965 की प्रभावशीलता संपूर्ण भारत में प्रत्येक कारखाने एवं ऐसी स्थापना जहां 20 से अधिक व्यक्ति नियोजित हैं तथा इसके मुख्य प्रावधान बोनस की गणना न्यूनतम 8.33 प्रतिशत तथा अधिकतम 20% बोनस रकम वसूली निरीक्षक दंडा अधिकारी ध्यान रखा गया है


नंबर 8
कारखाना अधिनियम 1948 का मुख्य प्रभावशीलता संपूर्ण भारत में तथा 10 या अधिक श्रमिक या 20 से अधिक बिना शक्ति चालित परिसर में कार्यरत हैं वहां यह कारखानों में प्रभाव सील है तथा मुख्य प्रावधान इसके हैं कारखाने हेतु लाइसेंस स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का संबंधी प्रावधान कल्याण सुविधाएं कार्य के घंटे स वे तनिक अवकाश दंड आदि का प्रावधान रखा गया है इसी तरह से श्रम कानून में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 तथा मध्य प्रदेश दुकान एवं स्थापना अधिनियम 1958 तथा ठेका श्रमिक विनियमन एवं उन्मूलन अधिनियम 1970 तथा मोटर परिवहन श्रमिक अधिनियम 1961 भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार नियोजन का विनियमन एवं सेवा शर्तें अधिनियम 1996 एवं अंतर राज्य प्रवासी कर्मकार रोजगार का विनियमन एवं सेवा अधिनियम 1979 एवं श्रमजीवी पत्रकार अन्य समाचार पत्र कर्मचारी सेवा शर्तें अधिनियम 1955 व मातृत्व हितलाभ अधिनियम 1961 क्रमशह समान पारा श्रमिक अधिनियम 1976 वबाल श्रमिक प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम 1986 तथा मध्य प्रदेश असंगठित कर्मकार कल्याण अधिनियम 2003 साथ ही कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 एवं कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम 1952 ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972 तथा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम 1996 तथा मध्य प्रदेश श्रम कल्याण निधि अधिनियम 1982 व असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम 2008 अलग-अलग मजदूरों के हित में कर्मचारियों के हित में अधिनियम पारित किए गए हैं इसके साथ ही समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 में बताया गया है कि भारत के संविधान के भाग 4 में राज्य की नीति के निदेशक तत्वों का उल्लेख किया गया है संविधान के अनुच्छेद 31 के खंड घ में प्रावधान है कि पुरुषों एवं स्त्रियों दोनों का समान कार्य के लिए समान वेतन हो इसी प्रावधान के अनुसरण में महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सामान पारा श्रमिक अधिनियम 1976 पारित किया गया इसका मुख्य उद्देश्य इस कानून का यह है कि पुरुष तथा महिला श्रमिकों को समान कार्य के लिए समान पारिश्रमिक का भुगतान सुनिश्चित करना तथा लिंग के आधार पर पुरुष तथा महिला श्रमिकों में नियोजन सेवा शर्तों पदोन्नत प्रशिक्षण अथवा स्थानांतरण के मामले में भेदभाव को रोकना है मध्य प्रदेश इंटक के सचिव नरेंद्र मिश्रा ने कहा कि श्रमिकों के सर्वांगीण विकास एवं कल्याण व प्रदेश की प्रगति के लिए यह आवश्यक है कि इन्हें अपने अधिकार एवं कर्तव्यों का ज्ञान हो इसी परिपेक्ष में मध्य प्रदेश सरकार की भावना के अनुरूप यह हम प्रयास कर रहे हैं इस कानून का अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर सभी को जानकारी होनी चाहिए तथा श्रम कानूनों का ज्ञान होना जितना आवश्यक नियोजक गणों को है उतना ही श्रमिक साथियों एवं श्रम क्षेत्र से जुड़े अन्य व्यक्तियों को होना चाहिए


निवेदक
नरेंद्र प्रसाद मिश्रा
श्रमिक शिक्षक
एवं प्रदेश सचिव
मध्य प्रदेश इंटक भोपाल एवं
प्रदेश अध्यक्ष
राष्ट्रीय अधिमान्य पत्रकार संगठन शाखा मध्य प्रदेश भोपाल

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