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भारत के विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में नीचे आने समेत अन्य ख़बरें

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भारत के विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में नीचे आने समेत अन्य ख़बरें

Daily khabar: आज की ज़रूरी ख़बरों का अपडेट.

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रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) द्वारा जारी विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2023 में भारत 11 स्थान फिसलकर 180 देशों में 161वें स्थान पर आ गया है. पिछले साल यह 150वें पायदान पर था. रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन 31 देशों में शामिल है, जिनके बारे में आरएसएफ का मानना है कि वहां पत्रकारों के लिए स्थिति ‘बहुत गंभीर’ है. इसमें यह भी कहा गया है कि भारत में सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों के ख़िलाफ़ मानहानि, राजद्रोह और राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरे में डालने के आरोप बढ़ रहे हैं और उन पर ‘राष्ट्र-विरोधी’ होने का ठप्पा लगाया जाता है.

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रमुख भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर महिला खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच को लेकर प्रदर्शन कर रहे पदक विजेता पहलवानों ने कहा है कि खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस मामले को दबाने का प्रयास किया. ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह भी जोड़ा कि बीते हफ्ते बृजभूषण के खिलाफ पॉक्सो समेत दो एफ़आईआर दर्ज होने के बाद भी दिल्ली पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं है क्योंकि न तो सिंह और न ही यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाली महिलाओं को पूछताछ के लिए बुलाया गया है.

गुजरात दंगों में सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई बिलकीस बानो द्वारा उनके साथ हुए अपराध के दोषियों की समय-पूर्व रिहाई की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने दोषियों के वकील से कहा कि ‘यह स्पष्ट दिख रहा है कि वे नहीं चाहते हम इस मामले को सुनें.’ इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पीठ की नाराजगी की वजह यह रही कि दोषियों में से कुछ के वकील ने प्रक्रियात्मक मसला उठाया और कहा कि उन्हें केस का नोटिस नहीं मिला है. उन्होंने बिलकीस पर कोर्ट से ‘गंभीर धोखाधड़ी’ करने का भी आरोप लगाया.

इसी सुनवाई में केंद्र और गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वे दोषियों की सजा माफी से संबंधित जानकारी पर विशेषाधिकार का दावा नहीं करेंगे और इसके मूल रिकॉर्ड अदालत के सामने रखेंगे. पिछली सुनवाई में उनके ऐसा करने से इनकार के बाद कोर्ट ने कहा था कि ऐसी स्थिति में वह इस बारे में अपने निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र होगा.

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह का नाम आबकारी नीति मामले में आने को लेकर कहा है कि पूरक शिकायत में लिपिकीय गलती के चलते ऐसा हुआ था. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इससे पहले सिंह में इसे लेकर एजेंसी को कानूनी नोटिस भेजा था. एजेंसी इस मामले में दिल्ली सरकार के कई नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ जांच कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में 2020 में गिरफ्तार किए गए संगठन पिंजरा तोड़ के तीन कार्यकर्ताओं- जेएनयू की नताशा नरवाल, देवांगना कलीता और जामिया मिलिया इस्लामिया के आसिफ़ इकबाल तन्हा की ज़मानत के खिलाफ दिल्ली पुलिस की याचिका ख़ारिज कर दी है. जून 2021 में इन्हें हाईकोर्ट से ज़मानत मिली थी, जिसके खिलाफ दिल्ली पुलिस शीर्ष अदालत तक पहुंची थी. इन्हें जमानत देते समय हाईकोर्ट ने कहा था कि ‘असहमति की आवाज को दबाने की जल्दबाजी में सरकार ने विरोध के संवैधानिक अधिकार और आतंकवादी गतिविधियों के अंतर को खत्म-सा कर दिया है.’

कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा भारत जोड़ो यात्रा के दौरान वीडी सावरकर पर टिप्पणी को लेकर लखनऊ में दर्ज एक मामले में एमपी-एमएलए अदालत ने पुलिस जांच का आदेश दिया है. लाइव लॉ के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि यह टिप्पणी महाराष्ट्र के अकोला में की गई थी और राहुल दिल्ली के रहवासी है, दोनों जगहें इस अदालत के अधिकारक्षेत्र से बाहर हैं, इसलिए मामले की पुलिस जांच की जानी चाहिए.

केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह समलैंगिक विवाह के मसले पर प्रशासनिक उपाय तलाशने के लिए समिति बनाएगा. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली संवैधानिक पीठ के सामने पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में यह समिति समलैंगिक विवाह को क़ानूनी मान्यता देने के मुद्दे को छुए बिना ऐसे जोड़ों के सामने आने वाले मसलों के बारे में विचार करेगी.

देशभर के कुल 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में बने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) सेल में से बमुश्किल ही किसी को फंड आवंटित हुए हैं या उन्होंने कोई गतिविधि ही आयोजित की हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के 23 आईआईटी में से 19 में ही ऐसे प्रकोष्ठ हैं, जिनमें से केवल पांच ने अब तक इसके जरिये कोई कार्यक्रम आयोजित किया है. दो आईआईटी के अलावा किसी अन्य ने ऐसे सेल के लिए कोई फंड आवंटित नहीं किया है और केवल तीन आईआईटी में सेल के काम करने के लिए एक अलग कमरा आवंटित हुआ है.

उत्तर प्रदेश के दो सेशन जज सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले महीने जारी अग्रिम जमानत देने संबंधी निर्देश न मानने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी का शिकार हुए हैं. हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को आदेश दिया है कि दोनों जजों को ट्रेनिंग के लिए राज्य न्यायिक अकादमी भेजा जाए.

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