जालंधर उपचुनाव 2023 लोकसभा उपचुनाव 2023 भाजपा कांग्रेस अकाली आप में जीत का अंतर घटेगा

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जालंधर उपचुनाव 2023 लोकसभा उपचुनाव 2023 भाजपा कांग्रेस अकाली आप में जीत का अंतर घटेगा
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जालंधर लोकसभा उपचुनाव 2023: जालंधर उपचुनाव के लिए बुधवार को मतदान हो चुका है, अब 13 मई को परिणाम घोषित किए जाएंगे। वोटिंग से पहले अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही सभी राजनीतिक मतदाताओं के लिए अब अनुपात के हिसाब से नजर आ रहे हैं, जिसकी एक बड़ी वजह बनी है- कम वोटिंग। इससे ना सिर्फ जीत के रेक्युशन में बदलाव हुआ है, बल्कि जीत का अंतर भी घटा है।

आख़िर क्या नतीजा निकलेगा?
आपको बता दें कि संगरूर उपचुनाव में वोटिंग प्रतिशत 45 प्रतिशत रहा था, जिसकी वजह से जीत का हिसाब बदला और अकाली दल ने जीत दर्ज की थी। इसी तरह जालंधर में इस बार 54 प्रतिशत वोटिंग हुई है। जिसके बाद बीजेपी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, अकाली-बसपा गठबंधन सभी राजनीतिक दल अंदाजा लगा रहे हैं कि नतीजा क्या रह सकता है।

इन 3 फैक्टर को छुपाते हैं पूरा मीटर
पहला कारक यह है कि कम मतदान से एक बात तो स्पष्ट है कि जीत दर्ज करने वाले उम्मीदवार और दूसरा नंबर पर रहने वाले उम्मीदवार के बीच वोटों का अंतर बहुत कम रहता है।

दूसरा कारक यह है कि उम्मीदवार की हार और शहरी वोटरों के हाथ में जीत है। बीजेपी वाले वोटों के अलावा जो मतदाता किसी भी दल को वोट नहीं किया गया। उसने जिस भी पार्टी को विधानसभा में वोट दिया था, वह उसे नुकसान पहुंचा रहा है।

तीसरा फैक्टर माना जा रहा है कि शाहकोट लाइटिंग में हुए विधानसभा चुनाव में बंपर वोटिंग में कांग्रेस की जीत हुई थी। इस बार शाहकोट में 78 हजार वोट पड़े हैं। यहां पर सबसे ज्यादा वोटिंग प्रतिशत 58 प्रतिशत है। इससे इस बार कांग्रेस और अकाली दल को उम्मीद है कि उनका वोट कटना सीमित है लेकिन आम आदमी पार्टी के लिए ये शुभ संकेत नहीं है। क्योंकि उनके उम्मीदवार सुशील रिंकु से इसी तरह के विधायक विधायक रहे हैं।

19 में से 15 बार कांग्रेस ने मारी बाजी मारी
इस बार कम पोलिंग की वजह से सभी मतदाताओं के अलग-अलग आंकड़े बन रहे हैं। जालंधर सीट पर साल 1999 में 49 वोट पड़े थे तो कांग्रेस के बलबीर सिंह की जीत हुई थी. साल 1992 में जब 30 प्रतिशत वोट गिरे थे तब भी कांग्रेस की जीत हुई थी। इसके अलावा साल 1971 में 71 फीसदी वोटिंग हुई थी तब शिरोमणि अकाली दल ने जीत की दर्ज की थी। अब तक जालंधर में 19 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिसमें से कांग्रेस ने 15 तो 2 बार अकाली दल और 2 बार जनता दल ने जीत दर्ज की है। पश्चिमी इलाके में विधानसभा चुनाव के फैसले के तहत विधानसभा चुनाव के उपचुनाव में वोटिंग कम हुई है।

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Umesh Solanki

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