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महाभारत जानिए दुर्योधन की पत्नी भानुमति के बारे में सबकुछ हिंदी मुहावरे कहीं की नहीं का रोड़ा

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महाभारत जानिए दुर्योधन की पत्नी भानुमति के बारे में सबकुछ हिंदी मुहावरे कहीं की नहीं का रोड़ा

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महाभारत, दुर्योधन पत्नी भानुमति कहानी हिंदी में: जब कभी महाभारत युद्ध की बात आती है तो कई शक्तिशाली और प्रमुख पात्रों के नाम सामने आते हैं। इन्हीं में से एक है दुर्योधन। महाभारत में दुर्योधन का नाम सबसे पहले आता है। क्योंकि दुर्योधन के कारण ही कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध हुआ था।

महाभारत में दुर्योधन के पात्रों के बारे में तो कई लोग जानते हैं। लेकिन महाभारत युद्ध की कहानी की बात करें तो यह कुछ प्रमुख महिलाओं की धुरी घूमती है। फिर चाहे वह कुंती के पांच पुत्रों की कहानी हो या फिर द्रोपती के चीरहरण की कहानी। लेकिन महाभारत के प्रमुख पात्र रहे दुर्योधन की पत्नी की कहानी से कई लोग आज भी अनन हैं।

कौन थी दुर्योधन की पत्नी

धर्म रीलों

दुर्योधन के बारे में तो बहुत से लोग जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुर्योधन का रिश्ता साथ हुआ था और दुर्योधन की पत्नी का क्या नाम था। आपको बता दें कि दुर्योधन की पत्नी का नाम भानुमति था। भानुमति कंबोज के राजा चंद्रवर्मा की पुत्री थी। जो कई कलाओं में डेक्सटर होने के साथ ही सुंदर आकर्षण और कुशाग्र बुद्धि की थी। भानुमति के पिता ने अपने विवाह के लिए स्वयंवर की घोषणा की। इस स्वयंवर में दूर-दूर के राजा-महाराजा और एक से बढ़कर एक धुरंधर शामिल हुए। स्वंयवर में शिशुपाल, जरासंध, रुक्मी, वक्री, दुर्योधन और कर्ण भी शामिल हुए थे।

भानुमति स्वंयवर के लिए मातृभूमि लेकर आगे बढ़ने लगी। दुर्योधन भानुमति के सुंदर रूप पर मोहित हो गए। लेकिन भानुमति का ध्यान दुर्योधन पर नहीं पड़ा और वह मातृभूमि लेकर आगे बढ़ने लगा। तब दुर्योधन ने स्वंय ही भानुमति के हाथों से बलपूर्वक अपने गले में माला डालवा ली और भानुमति को अपनी पत्नी बनाया।

दुर्योधन और भानुमति की थी दो संन्यास
दुर्योधन से भानुमति ने दो जुड़वाँ संतों को जन्म दिया। पुत्र का नाम लक्ष्मण और पुत्री का नाम लक्ष्मणा था। लक्ष्मण को महाभारत युद्ध में अभिमन्यु ने मार दिया और पुत्री लक्ष्मणा का विवाह भगवान श्रीकृष्ण के जाम्बवंती से जन्मे पुत्र साम्ब के साथ संपन्न हुआ।

भानुमती के नाम पर बना ये मुहावरा

‘कहीं की ईंटें कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ी’। भानुमति के नाम की यह कहावत आज भी शहर और गांव में कही जाती है। वास्तव में यह कहावत इसलिए बनी है, क्योंकि भानुमति ने दुर्योधन को अपने पति के रूप में नहीं चुना था। बल्कि स्वयंवर में दुर्योधन ने जबरन कर्ण के सहयोग से भानुमति से विवाह रचाई थी। दुर्योधन और भानुमति की बेटी लक्ष्मणा को कृष्ण पुत्र साम्ब ने हरण कर लिया। इस कारण यह कहावत बनी हुई है, जो आज भी प्रचलित है

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