गुरु प्रदोष व्रत 2023 कब है पूजा का समय ज्येष्ठ प्रदोष व्रत का महत्व

0
46
Spread the love


ज्येष्ठ गुरु प्रदोष व्रत 2023: धर्म शास्त्रों में सोमवार के अलावा ऐसे कई प्रसंगों का वर्णन है, जिस दिन पूजा करके शिव जी की कृपा पाई जा सकती है। इन छोटे पर्दे में से एक है त्रयोदशी तिथि, इस दिन महादेव के निमित्त प्रदोष व्रत रखा जाता है।

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत गुरुवार को है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। मान्यता है कि गुरु प्रदोष व्रत के प्रभाव से शत्रु पर विजय प्राप्ति का वरदान मिलता है और कार्य बिना रुकावट के पूर्ण होता है। आइए जानते हैं ज्येष्ठ माह के गुरु प्रदोष व्रत की तिथि, मुहूर्त और महत्व।

ज्येष्ठ गुरु प्रदोष व्रत 2023 तिथि (ज्येष्ठ गुरु प्रदोष व्रत 2023 तिथि)

ज्येष्ठ माह का गुरु प्रदोष व्रत 1 जून 2023, गुरुवार को रखा जाएगा। शास्त्रों में भोलेनाथ की पूजा करने के लिए सबसे उत्तम और पवित्र समय प्रदोष काल अर्थात शाम का समय बताया गया है, क्योंकि इस समय कैलाश पर्वत में महादेव डमरू बजाते हुए हुए प्रदोष नृत्य करते हैं।

गुरु प्रदोष व्रत 2023 मुहूर्त (Guru Pradosh Vrat 2023 Muhurat)

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 01 जून 2023 को दोपहर 01 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 02 जून 2023 को दोपहर 12 बजकर 48 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में शिव पूजा के लिए शाम का समय 1 जून को प्राप्त हो रहा है।

  • शिव पूजा समय – शाम 07.14 – रात 09.16 (01 जून 2023)

गुरु प्रदोष व्रत का महत्व (गुरु प्रदोष व्रत का महत्व)

शास्त्रों में हर प्रदोष व्रत का महत्व बताया गया है। मान्यता है कि गुरु प्रदोष व्रत धारण करने वालों को शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है। यदि आपके विरोधी आपके काम के आदी हैं या बेवजह परेशान कर रहे हैं तो गुरु प्रदोष व्रत के दिन शाम को शिवलिगं का जलाभिषेक करने से इस समस्या से राहत मिल सकती है। ये व्रत साधकों के हर काम में सफलता की जानकारी है। सुख-समृद्धि में वृद्धि करता है।

गुरु प्रदोष पूजा विधि (गुरु प्रदोष व्रत पूजा विधि)

ब्रह्ममुहूर्त में उठकर प्रात:काल स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान का स्मरण कर एवं पूजा का संकल्प लें। सायंकाल में पूजा के दौरान भोलेनाथ को बेलपत्र, भांग, फूल, धतूरा, गंगाजल, धूप, दीप, गंध आदि अर्पित करें। अब प्रदोष की कथा पढ़ें और शिव जी की आरती करें। अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करके व्रत का समापन करें।

देवशयनी एकादशी 2023: देवशयनी एकादशी कब? जानें तारीख, इस दिन से बंद हो जाएंगे सभी मांगलिक कार्य

अस्वीकरण: यहां बताई गई जानकारी सिर्फ संदेशों और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी विशेषज्ञ की जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित सलाह लें।



Source link

Umesh Solanki

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here