वन विभाग के द्वारा रोजनदार मजूर का शोषण।

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गड़चिरोली : जिले के सभी वन परिक्षेत्र में नियुक्त रोजनदर मजूर गार्ड चौकीदार के साथ अन्नय। वेतन 9 हजार से ज्यादा नही। काम 15 घंटे से ज्यादा। आखिर जिले के बेरोजगार के साथ कबतक अन्नय कर शोषण किया जाता रहेगा?अनगिनत रोजनदार मजूर पिछले 20 से 24 साल से वन विभाग में सेवा दे रहे हैं। आखिर पिछड़ा जिले के नाम पर स्थाई जनप्रतिनिधि और प्रशासन बंधुवा मजदूर की तरह 15 घंटे से ज्यादा काम करवा कर उनके साथ खिलवाड़ क्यों कर रही हैं? क्यों उनके साथ मानवाधिकार का हनन खुलेआम किया जा रहा हैं? क्यू उनके परमानेंट पदोनीति देकर स्थाई नही किया जा रहा? गड़चिरोली जिले के वन विभाग के द्वारा स्थाई बेरोजगार के साथ अन्नय का खेल कबतक करती रहेगी? वन विभाग शासन के अधिनियम सार्वजनिक करे क्या बंधुवा मजदूर जैसा काम पर रखने का नियम हैं या नहीं? पिछले 24 सालो से काम कर रहे रोजनदार मजूर चौकीदार गार्ड को पीएफ क्यों नही लागू की गई? आखिर गड़चिरोली जिले के स्थाई के साथ भेदभाव क्यों? आनेवाले समय में अपने हक के लिए मजबूर ना होना पड़े पीड़ित रोजनदार को। जल्द शासन को सभी रोजनदार मजूर और अन्य को आवाज उठाने की जरूरत ना पड़े? अब मानवाधिकार आयोग क्या कहेगी क्या ये सब मानवाधिकार का हनन नहीं हैं? क्या मानवाधिकार संस्था भी शोषण को देखकर अब स्वार्थ के लिए काम करने लगी हैं? या जिले में वन विभाग द्वारा हो रही शोषण के खिलाफ पीड़ित के साथ खड़ी होगी?

गड़चिरोली से ज्ञानेंद्र बिस्वास

संजय रामटेके ( सह संपादक )

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