देवशयनी एकादशी 2023 पूजा विधि नियम एकादशी नियम के दिन कभी न करें ये गलतियां

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देवशयनी एकादशी 2023: 29 जून 2023 को देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु का शयनकाल प्रारंभ होगा। इसी दिन से चातुर्मास प्रारंभ हो जायेगा। चातुर्मास में विवाह, मुंडन, ग्रह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य पर रोक लग जाती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का व्रत विष्णु जी की कृपा से प्राप्त करने से उत्तम फल मिलता है।

इस दिन कुछ ऐसे काम हैं जो भूलकर भी नहीं करने चाहिए तो जीवन में तनाव आने लगता है और साथ में ही रूढ़िवादिता पैदा होने लगती है। आइए जानते हैं देवशयनी एकादशी व्रत के नियम, लाभ और उपाय।

देवशयनी एकादशी व्रत का लाभ

  • देवशयनी एकादशी का व्रत मन को स्थिर कर जीवन को सुखी बनाता है।
  • देवशयनी एकादशी व्रत से सात जन्मों के पाप मिलते हैं और मृत्यु के बाद मोक्ष मिलता है।
  • इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को नर्क की यतनाएं सहनी नहीं मिलती, मृत्यु का भय नहीं रहता।
  • देवशयनी एकादशी का व्रत करने से सिद्धि प्राप्त होती है।
  • देवशयनी एकादशी का व्रत रखने और विष्णु पूजा करने से मन शुद्ध होता है और मानसिक विकार दूर होते हैं।

देवशयनी एकादशी पर न करें ये काम (देवशयनी एकादशी व्रत नियम)

  • देवशयनी एकादशी पर तुलसी में जल न चढ़ाएं। इस दिन विष्णु प्रिय तुलसी माता का भी निर्जल व्रत लिखा जाता है। साथ ही इस दिन तुलसी दल न तोड़े जाने से माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं।
  • देवशयनी एकादशी पर दातुन करना, दूसरे की निंदा करना पाप का भागी बनता है।
  • देवशिनि एकादशी चावल खाना और चावन का दान करना अवांछनीय माना जाता है। ऐसा होता है अगले जन्म में कीड़े-मकौड़े की योनि में जन्म।
  • इस दिन महिला प्रसंग न करें. दशमी तिथि से प्रारंभ होने वाला व्रत दशमी तिथि से शुरू होकर द्वादशी तिथि तक ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • देवशयनी एकादशी व्रत में तन के साथ मन की गुड़िया भी रखें। मन में बुरा विचार न लाइक, किसी को अपशब्द न बोलें।

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अस्वीकरण: यहां चार्टर्ड सूचना सिर्फ अभ्यर्थियों और विद्वानों पर आधारित है। यहां यह जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह के सिद्धांत, जानकारी की पुष्टि नहीं होती है। किसी भी जानकारी या सिद्धांत को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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Umesh Solanki

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