Home Lifestyle महाभारत शिखंडी की कहानी हिंदी में भीष्म की मृत्यु की कहानी का कनेक्शन हिंदी में

महाभारत शिखंडी की कहानी हिंदी में भीष्म की मृत्यु की कहानी का कनेक्शन हिंदी में

0

[ad_1]

महाभारत, शिखंडी: महाभारत में केवल युद्ध ही नहीं बल्कि इसमें धर्म, नीति, राजनीति, ज्ञान, शास्त्र, योग, इतिहास आदि का समग्र समावेश है। भीष्म पितामह को महाभारत का मुख्य पात्र माना जाता है।

महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामह भले ही अर्जुन के बनों के शर शय्या पर आ गए लेकिन उनकी मृत्यु का कारण कोई और ही था। इसका नाम शिखंडी रखा गया। महाभारत में शिखंडी के रहस्यमयी पात्र माने जाते हैं। कौन शिखंडी था, जिसके कारण भीष्म पितामह को मृत्यु शैय्या पर लेटना पड़ा। आइए जानते हैं।

शिखंडी कौन था ?

महाभारत के अनुसार शिखंडी पूर्णजन्म में अंबा नाम की राजकुमारी थी, वो भीष्म की मृत्यु की कामना से शिखंडी रूप में पुन: जन्म लिया था। धर्म ग्रंथ के अनुसार भीष्म ने हस्तिनापुर के सर्वप्रथम राजा और छोटे भाई विचित्रवीर्य के विवाह के लिए काशीराज के तीन पुत्रों अंबा, अंबिका और अंबालिका को हरण कर लिया था। जब भीष्म को पता चला कि अम्बा राजा शाल्व को प्यार करता है तो उन्होंने उसे राजा शाल्व के पास भेज दिया लेकिन राजा शाल्व ने अम्बा को ठुकरा दिया।

भीष्म की मृत्यु के लिए शिव ने दिया शिखंडी को वरदान

हताश अंबा परशुराम के पास पहुंचने और भीष्म से बदला लेने का आग्रह किया। परशुराम जी ने अंबा को भीष्म से विवाह की सलाह दी लेकिन भीष्म ने आधार ब्रह्मचारी रहने के संबंध में शादी करने से इनकार कर दिया। अंबा के साथ अन्याय के बाद परशुराम जी भीष्म से युद्ध करने पहुंचे, लेकिन भीष्म ने उन्हें हरा दिया। चारों ओर से निराशा में छाई अंबा ने आखिरकार शिव की शरण ली। उसने अपने तप से शिव को प्रसन्न किया और वर मांगा कि मांगा कि इच्छामृत्यु का वर पाए भीष्म की मृत्यु का कारण वह बने। शिव ने कहा कि यह अगले जन्म में ही संभव हो सकेगा।

अगले जन्म में ऐसे स्त्री से पुरुष बने शिखंडी

अंबा ने भीष्म से बदला लेने के लिए अपना जीवन समाप्त कर दिया। अगले जन्म में अंबा ने शिखंडी के रूप में राजा द्रुपद के यहां जन्म लिया। राजा ने राजकुमारी के पालने वाले पुरुषों की तरह ही किया था। युवास्थ में आने पर एक यक्ष ने अपना पुरुषत्व शिखंडी को दिया जिससे वह पुरुष बन गई थी। महाभारत युद्ध के समय

ऐसे हुआ भीष्म पितामह की मृत्यु

जब युद्ध में वह घड़ी आई कि भीष्म को हरा पाना असंभव हो गया तब श्री कृष्ण ने शिखंडी को युद्ध में चढ़ाई। भीष्म पितामह ने जाल पर शस्त्र नहीं उठाने की प्रतिज्ञा की थी, क्योंकि शिखंडी महिला से पुरुष बना था, इस वजह से भीष्म ने अपने शस्त्र दिए गए। ऐसे में अर्जुन ने शिखंडी को ढालने वाली भीष्म को अपने तीरों से छलनी कर दिया। ऐसे शिखंडी भीष्म पितामह की मृत्यु का कारण बना।

गुरुवर के उपाय: गुरुवार के दिन करें ये उपाय, गुरु दोष होगा दूर, नौकरी और बिजनेस में लाभ होगा

अस्वीकरण: यहां देखें सूचना स्ट्रीमिंग सिर्फ और सूचनाओं पर आधारित है। यहां यह बताता है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, सूचना की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी विशेषज्ञ की जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित सलाह लें।

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here